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एयर इंडिया क्रैश: कैप्टन साठे के चचेरे भाई ने उनकी बहादुरी के बारे में अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा - motivational story in hindi

Motivational Story in Hindi : कैप्टन दीपक वसंत साठे, भारतीय वायु सेना (IAF) के पूर्व विंग कमांडर थे। उनके चचेरे भाई, निलेश साठे ने अपनी फेसबुक पोस्ट में पायलट के बारे में जानकारी साझा की।

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कैप्टन दीपक वसंत साठे की प्रेरक कहानी - Motivational Story in Hindi

दुबई से एयर इंडिया एक्सप्रेस का एक प्लेन 180 यात्रियों को लेकर केरल आ रहा था। लेकिन केरल के कोझिकोड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे वह प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इस भयावह त्रासदी में वह दो टुकड़ों में टूट गया। इस भयावह प्लेन दुर्घटना में कैप्टन (विंग कमांडर) दीपक वसंत साठे और उनके साथी अधिकारी अखिलेश कुमार के साथ 18 यात्रियों की जान चली गई थी।

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पूर्व भारतीय वायु सेना विंग कमांडर साठे ने जून 1981 में हैदराबाद के पास डुंडीगल में वायु सेना अकादमी से स्नातक किया और 22 वर्षों तक भारतीय वायु सेना में सेवारत रहे।

Deepak Sathe Inspirational Story in Hindi

उनके चचेरे भाई निलेश साठे ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में उन्हें याद करते हुए लिखा कि कैसे साठे ने नब्बे के दशक की शुरुआत में वायुसेना में एक विमान दुर्घटना में बच गए थे। उस दुर्घटना में उनकी खोपड़ी में कई चोटें लगी थी, जिसकी वजह से उन्हें 6 महीने के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था और किसी ने नहीं सोचा था कि वह फिर से उड़ान भरेंगे। लेकिन वो अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और अपने उड़ान के लिए प्यार से फिर से प्लेन उड़ा सके। यह किसी चमत्कार से कम नही था।

विंग कमांडर दीपक साठे के साथ उनकी अंतिम बातचीत -  Motivational Story in Hindi

दुर्घटना के एक हफ्ते पहले, नीलेश और विंग कमांडर दीपक साठे ने "वंदे भारत मिशन" के बारे में बातचीत की थी।

नीलेश ने अपनी पोस्ट में बताया की विंग कमांडर दीपक साठे अरब देशों में रह रहे हमारे देशवासियों को वापस लाने पर वह गर्व महसूस कर रहे थे। जब मैंने उनसे पूछा, क्या आप खाली विमान ले जाते हैं क्योंकि उन देशों में यात्रियों के प्रवेश की अनुमति नहीं है? तो उन्होंने जवाब दिया था, ओह, नहीं। हम इन देशों में फल, सब्जियां, दवाइयाँ आदि लेकर जाते हैं, कोई भी विमान कभी भी खली नही जाता है।

विंग कमांडर दीपक साठे, अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ रहते थे। उनके भाई कैप्टन विकास भारतीय सेना (Army) में थे, जो जम्मू में सेवा करते हुए शहीद हो गए थे।

ये थी नीलेश की फेसबुक पोस्ट जो की English में थी इसे हमें हिंदी में translate करके लिखा है - motivational story in hindi

यह मानना कठिन है कि मेरे चचेरे भाई से ज्यादा मेरे दोस्त दीपक साठे अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह एयर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट थे, जो दुबई से "वंदे भारत मिशन" में यात्रियों को लेकर केरल वापस आ रहा था, जिसने कल रात कोझीकोड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रनवे में दुर्घटना ग्रस्त हो गया।

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दीपक साठे हमें बहुत कुछ सिखा कर गए हैं, उन्होंने प्लेन में मौजूद यात्रियों की जिंदगी बचाने के लिए क्या किया था, जानें :

  • प्लेन के लैंडिंग गियर काम नहीं कर रहे थे।
  • पूर्व वायुसेना के पायलट ने ईंधन को खाली करने के लिए हवाई अड्डे के तीन चक्कर लगाए ताकि दुर्घटना होने के बाद विमान में आग लगने से बचाया जा सके। इसी वजह से दुर्घटनाग्रस्त विमान से कोई धुंआ निकलता नहीं देखा गया।
  • दीपक साठे के सह-पायलट "" ने दुर्घटना से ठीक यानी प्लेन के जमीन में आने से पहले पहले इंजन को बंद कर दिया, ताकि आगे लगने का खतरा ना के बराबर हो जाए।
  • विमान के राइट विंग खराब हो गए थे।
  • इस दुर्घटना में प्लेन में मौजूद दोनों पायलट तो शहीद हो गए लेकिन उन्होंने विमान में मौजूद 180 यात्रियों की जान बचा ली।
  • विमान के लैंडिंग के वक्त वहाँ तेज़ बारिश हो रही थी, जिससे दृश्यता सिर्फ़ 20 मीटर की थी। ऐसे में तीन कोशिश के बाद ही विमान के दोनों पायलट उसे रनवे पर उतार सके।
आप "kahani.hindualert.in" भारतीय वायु सेना के  विंग कमांडर दीपक साठे की motivational story in hindi पढ़ रहे हैं। इस "Deepak Sathe Inspirational Story in Hindi" में आप जानेंगे की कैसे दीपक साठे ने अपनी जान देकर प्लेन में मौजूद यात्रियों की जान बचाए थे।

36 साल की उड़ान के अनुभव के साथ दीपक एक अनुभवी पायलट थे। एनडीए के पासआउट, 58वें कोर्स में टॉपर और 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' का पुरस्कार पाने वाले दीपक ने 2005 में एयर इंडिया के साथ कमर्शियल पायलट के रूप में जुड़ने से पहले 21 साल तक भारतीय वायु सेना की सेवा की।

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वह अपनी पत्नी और दो बेटों को छोड़ कर इस दुनिया से चले गए। उनके दोनों बेटे आईआईटी मुंबई से पासआउट हैं। कर्नल वसंत साठे का बेटा है, अपनी पत्नी के साथ नागपुर में रहता है। उनके भाई कैप्टन विकास भी एक आर्मीमैन थे जिन्होंने जम्मू क्षेत्र में सेवा करते हुए अपना बलिदान दे दिया।

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