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राधा और उसकी सौतेली माँ की कहानी - Kahani, Hindi Stories, bacchon ki kahaniyan

kahani - Radha aur uski Sauteli Maa ki bacchon ki kahaniyan

एक गाँव में एक परिवार में राधा नाम की लड़की रहती थी। राधा के पैदा होती ही उसकी मां का देहांत हो गया था। घर के सभी लोग राधा को उसकी मां के मरने का कारण मानते थे और उससे बहुत बुरा व्यवहार करते थे। राधा जब थोड़ी ही बड़ी हुई तो उसे घर का सारा काम करवाया जाने लगा और उसे स्कूल भी नहीं जाने दिया जाता था और जब राधा के पिता ने दूसरी शादी कर ली तो राधा के दुख और भी बढ़ गए थे।

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राधा की सौतेली बहन और सौतेला भाई स्कूल भी जाते थे उन्हें बहुत से खिलौने भी दिए जाते थे और सभी लोग उनसे बहुत प्यार करते थे, राधा बहुत दुखी रहती थी। राधा ने अपने पापा से कहा पापा मैं भी पढ़ना चाहती हूं। तो उसके पापा ने कहा - तू स्कूल जाएगी तो घर का काम कौन करेगा स्कूल जाने की बात मत करना।

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राधा रोते-रोते झाड़ू लगाने लगती है उस दिन खाना भी नहीं खाती और अपनी मां की फोटो के आगे दिन भर रोती रहती है कोई उसे इसका कारण भी नहीं पूछता। फिर उसकी सौतेली मां की चिल्लाने की आवाज आती है - कहां मर गई राधा? अभी तक घर का काम क्यों नहीं की? सौतेली माँ की आवाज़ सुन कर राधा जल्दी से घबराकर उठती है जल्दी से घर के आंगन में पहुंच जाती है। उसकी सौतेली माँ कहती है - क्या हुआ मां तूने कल घर की झाड़ू तोड़कर कहां पर फेंक दी?

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राधा ने कहा - मां मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया? उसकी माँ कहती है - कामचोर तु जान बूझ कर झाड़ू तोड़ कर फेंकी है ना, ताकि तुझे झाड़ू ना लगाना पड़े। इसलिए तूने झाड़ू तोड़ दी। चल जा अभी नई झाड़ू लेकर आ। राधा पास के बाजार जाती है और एक नई झाड़ू खरीद कर लाती है।

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घर आकर वह झाड़ू कोने में रख देती है और पानी पीने जाती है जैसे ही पानी पीकर आती है देखती है कि घर में झाड़ू लग चुकी होती है। यह देख कर वह हैरान हो जाती है कि इतनी जल्दी घर की सफाई कैसे हो गई। उसकी सौतेली माँ चिल्लाते हुए कहती है - अरे राधा झाड़ू लेकर आई की नहीं, घर की सफाई होगी कि नहीं। इतना कहते-कहते वह किचन से बाहर आती है, तो देखती है कि पूरा घर साफ है। वह आश्चर्य में पड़ जाती है कि इतनी जल्दी पूरा घर साफ कैसे कर दिया है इसने। अपने आप सफाई हो गई क्या?

फिर उसकी माँ चिल्लाते हुए कहती है अब जाके कपड़े धो। राधा कपड़े धोने जाती है और जैसे ही कपड़े धोने बैठती है, तो देखती है  कि उसके बगल में झाड़ू रखी है। राधा झाड़ू  को उसकी जगह पर रख आती है, थोड़ी देर बाद फिर देखती है कि झाड़ू उसके बगल में रखी है।

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राधा फिर से उस झाड़ू को उसकी जगह पर वापस रख आती है, लेकिन जब वह वापस आती है, तो देखती है कि सारे कपड़े धोकर सूख रहे हैं। राधा को समझ में नहीं आता कि आखिर हो क्या रहा है? राधा डांट और मार के डर से किसी को कुछ नहीं बताती है। राधा घर में जहां-जहां काम करने जाती है, झाड़ू उसके पास आकर खड़ी हो जाती है फिर उसे लगने लगता है कि झाड़ू में ही कुछ गड़बड़ है, तो डर के मारे उसे बाहर फेंक आती है। लेकिन जैसे ही राधा घर में वापस आती है, झाडू उसके घर में फिर मिलती है।

डर के मारे उसे रात भर नींद नहीं आती। रात में उसे किसी की आवाज सुनाई देती है। राधा कहती है - कौन है? यह किसकी आवाज़ है? फिर आवाज़ आई - राधा मैं तुम्हारी मां हूँ। राधा मैं तुम्हारी मरी हुई मां हूं। अपनी मां की आवाज सुनकर आधा रोने लगती है और अपनी पूरी कहानी अपनी मां को सुनाती है। राधा की माँ कहती है - मुझे सब पता है राधा। अब मैं सब ठीक कर दूंगी और मैं तुम्हारे हर काम में सहायता करूँगी।

Kahani : अब राधा को घर में कोई काम नहीं करना पड़ता। सब काम झाड़ू कर देती है। राधा यह सब देख कर बहुत खुश होती है। राधा की सौतेली मां को यह सब देखकर हैरानी हो जाती है इतनी छोटी सी बच्ची इतनी जल्दी घर का सारा काम कैसे कर रही है। उसका शक बढ़ता ही जाता है और वह राधा पर नजर रखने लगती है।

एक रात वह राधा को किसी से बात करते सुन लेती है लेकिन उसे कोई दिखाई नहीं देता कि राधा किससे बात कर रही है। दूसरे दिन वह राधा को बहुत मारती है और पूछती है कि वह किससे बात कर रही थी? और घर में क्या हो रहा है? राधा अपनी सौतेली मां को कुछ नहीं बताती। लेकिन रात को अपनी मां को सब कुछ बताती है और बहुत रोती है कि मुझे आज सौतेली मां ने बहुत मारा।

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राधा की मां को बहुत गुस्सा आता है और वह झाड़ू से कहती है कि जाओ और अपना काम करके आओ। झाड़ू जाती है और रात को ही राधा की सौतेली मां की बहुत पिटाई लगाती है। राधा की सौतेली मां मार खाकर बहुत चिल्लाती है, लेकिन किसी को भी झाड़ू दिखाई नहीं देती कि क्या हो रहा है? सब पूछते हैं कि क्या हो रहा है? क्यों चिल्ला रही हो? वह कहती है कि मुझे झाड़ू मार रही है, पर किसी को भी झाड़ू नहीं दिखाई देती। अब रोज रात को यही होता सौतेली मां की पिटाई होने लगी थी। जिससे वह रोज़ चिल्लाती थी।

Kahani : सब को लगने लगा था कि सौतेली मां पागल हो चुकी है। राधा के पापा ने उसका इलाज करवाना शुरू कर दिया था लेकिन रोज रात की पिटाई होना बंद नहीं हो रही थी। बहुत इलाज करवाने के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ, तो राधा के पापा ने सौतेली मां को पागलखाने में भर्ती करवा दिया।

वहां एक दिन सौतेली मां के सपने में राधा की मां आई और उसने बोला कि तुम मेरी बेटी को बहुत परेशान करती हो। इसलिए मैंने तुम्हारी ऐसी हालत कर दी है, अगर अब तुम मेरी बेटी से माफी मांगो और यह वादा करोगी कि कभी भी उसे परेशान नहीं करोगी मारोगी नही, तो मैं तुम्हारा पीछा छोड़ दूंगी और तुम्हें घर वापस भिजवा दूंगी।

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Kahani : सौतेली मां, राधा की माँ से वादा करती है की वह अब अपने बच्चों की तरह ही राधा को पालेगी। दूसरे दिन पागलखाने का डॉक्टर राधा के पापा को बुलाकर कहते हैं कि राधा की मां ठीक हो चुकी है, इनको आप घर ले जा सकते हो। सौतेली मां घर आ जाती है और राधा को अपने बच्चों की तरह प्यार करने लगती है और स्कूल भी भेजने लगती है। राधा समझ जाती है कि यह सब क्यों हो रहा है? वह खूब मन लगाकर पढ़ाई करती है और मन ही मन अपनी मां को धन्यवाद देती है।

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