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हिरन की भूमिगत गुफा और नीलगाय (Deer Underground Cave Panchatantra Hindi Story)

Deer Underground Cave Panchatantra Hindi Story (हिरन की भूमिगत गुफा और नीलगाय) : काफ़ी समय पहले एक जंगल में हिरन अपने परिवार और बच्चों के साथ रहती थी। हिरन काफ़ी चालाक और होशियार थी। उस जंगल में बारिश शुरू होने से कुछ दिन पहले सभी जानवर बारिश से बचने के लिए अपना-अपना घर सुधार लेते थे। लेकिन हिरन कभी ऐसा नही करती थी। एक बार की बात है, बारिश शुरू हो गई। सभी जानवर अपना घर सुधारने में लगे हुए थे, वही हिरन मौज-मस्ती में जंगल में अपने बच्चों के साथ चरने में लगी थी।

Deer Underground Cave Panchatantra Hindi Story
Deer Underground Cave Panchatantra Hindi Story

तभी वहाँ से एक नीलगाय निकल रही थी। उसने हिरन को ऐसा करते देख उससे पूछ लिया – ‘हिरन बहन, इस बारिश में सब अपने घर सुधार रहे हैं, ताकि बारिश से बच सकें। लेकिन तुम ऐसे घूम रही हो? तुम्हें अपने बच्चों का ख़्याल नही रखना क्या? ये बेचारे बारिश में कहाँ जाएँगे?

इतना सुन उस हिरन ने कहा – ‘नीलगाय बहन, ऐसा कुछ नही है। मैंने अपने रहने के लिए पहले से ही बंदोबस्त कर रखा है’।
ये सुन नीलगाय ने कहा – ऐसा क्या है, यहाँ तो हमें ऐसा कुछ नही दिख रहा। कोई जादुई घर है क्या जो हमें नही दिख रहा? या फिर कोई सीक्रेट घर है जो हमें नही दिखाना चाहती।

तब हिरन ने कहा – ‘नही, कोई जादुई घर तो नही है, लेकिन हाँ ये एक सीक्रेट है जो मेरे और मेरे बच्चों के अलावा कोई नही जानता’।
हिरन की बात सुन कर नीलगाय सोच में पड़ जाती है। ऐसा कैसे हो सकता है। यह सब सोचते सोचते वो वहाँ से चली जाती है।

असल में उस हिरन ने बारिश और दुश्मनों से बचने के लिए एक भूमिगत गुफा बनाई हुई थी। बारिश होने पर वो अपने बच्चों के साथ उसी गुफा में रहती थी। बाक़ी जानवरों को इसके बारे में कोई जानकारी नही थी। इसीलिए सब सोचते रहते थे कि आख़िर हिरन बारिश के समय रहती कहाँ है?

ख़ैर, शाम होने वाली होती है और बारिश भी तेज होने लगी। तब हिरन अपने बच्चों को लेकर गुफा में चली जाती है। गुफा में जाकर वो अपने बच्चों से कहती है – सुनो बच्चों, बारिश होने पर हम यहीं रहा करेंगे। ये हमारा एक सीक्रेट घर है। इसके बारे में कभी किसी को मत बताना। इसमें हम बारिश के साथ दुश्मनों से भी सुरक्षित रह सकते हैं।

हिरन की बात सुन कर उसके बच्चे – हाँ में हाँ मिलाते हैं। और वो रात में उसी गुफा में सो जाते हैं। हिरन ने उस गुफा में कुछ खाने का सामान भी रखी थी, इसलिए जब तक बारिश होती वो वहीं रहते, बारिश के बाद गुफा से बाहर आते थे।

बारिश, ठंडी, गर्मी हर मौसम में हिरन इसी गुफा में रहा करती थी। ऐसे ही कई महीने गुजरते चले गए और फिर गर्मी का मौसम आ गया। इस साल उस जंगल में भीषण गर्मी पड़ी थी, जिससे जंगल सूखने लगा और जगह-जगह आग भी लगने लगी। ऐसे में जानवरों का घर और खाने का सामान पूरी तरह बर्बाद हो गया। सभी जानवर धीरे-धीरे उस जंगल को छोड़कर दूसरे जंगल में जाने लगे।

एक दिन जब नीलगाय उस जंगल को छोड़ कर जा रही थी। तो उसने देखा कि हिरन अभी भी इसी जंगल में है। वो हिरन के पास गई और पूछा – ‘हिरन, तुम भी चलो हमारे साथ दूसरे जंगल में, यहाँ तो सूखा पड़ा है। अब ना तो खाने के लिए है और ना ही रहने के लिए घर। हर तरफ़ सिर्फ़ तेज धूप और गर्मी’।

नीलगाय की बात सुन कर हिरन बोली – बहन, मैं यहीं रहूँगी। मैंने अपने खाने और रहने के लिए पहले ही बंदोबस्त कर रखा है।

ये सुन कर नीलगाय सोचने लगती है। आख़िर ऐसा क्या बंदोबस्त इसने किया है, जो इसे ना तो बारिश की टेन्शन रहती है और ना ही सूखे की। फिर नीलगाय एक प्लान बनाती है और छुपकर हिरन पर नज़र रखने लगती है।

शाम को जब हिरन अपने गुफा की तरफ़ जा रही थी, तो नीलगाय भी छिपती हुइ उसके पीछे-पीछे चली जाती है। हिरन अपने गुफा के पास पहुँच कर ग़ायब हो जाती है। नीलगाय कुछ समझ नही पाती। और सोचने लगती है आख़िर हिरन कहाँ ग़ायब हो गई। अभी तो यहीं थी, अब पता नही कहा चली गई। यही सोच कर नीलगाय हिरन को इधर-उधर खोजने लगती है।

तभी झाड़ियों में छिपे एक भूखे शेर की नज़र नीलगाय पर पड़ती है और वो चुपके से उसकी तरफ़ आने लगता है। तभी हिरन अपनी गुफा का दरवाज़ा बंद करने बाहर आती है, तो उसकी नज़र शेर पर पड़ती है जो नीलगाय का शिकार करने के लिए जा रहा था। तभी हिरन शेर का हमला होने से पहले नीलगाय को अपने साथ लेकर गुफा के अंदर चली जाती है और गुफा का दरवाज़ा बंद कर लेती है। अब शेर नीलगाय को वहाँ ना पाकर सोच में पड़ जाता है आख़िर ये कहा ग़ायब हो गई, अभी तो यहीं थी।

गुफा में जाने के बाद नीलगाय ने हिरन से कहा – अच्छा तो ये है तुम्हारा सीक्रेट घर। यह बहुत अच्छा है। अब मैं भी अपने लिए एक गुफा बनाऊँगी। तब हिरन उसको कहती है – ‘तुम्हें पता भी है, तुम अभी किस मुसीबत में थी। शेर तुम्हारा शिकार करने वाला था। वो तो अच्छा हुआ मेरी नज़र तुम पर पड़ गई, नही तो आज ना जाने क्या हो जाता’। इतना सुन कर नीलगाय के होश ही उड़ गए। वो हिरन को धन्यवाद कहती है और उस रात हिरन कि भूमिगत गुफा में ही सो जाती है।

फिर अगले दिन से नीलगाय भी अपने लिए इसी तरह की एक गुफा बनाने लगती है। गुफा बनाने में हिरन ने भी मदद की, तब तक नीलगाय हिरन की गुफा में ही रात बिताती थी। नीलगाय की गुफा बनने के बाद वो अपनी गुफा में आराम से रहने लगती है और हिरन को फिर से धन्यवाद कहती है।

Moral of The Deer Underground Cave Panchatantra Hindi Story : इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि किसी भी विषम परिस्थिति का सामना करने के लिए हमें पहले से तैयारी करके रखनी चाहिए। समस्याओं से हमें भागने के बजाय उसका समाधान खोजना चाहिए।

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