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गप्पू का ढाबा और घमंडी मालिक रीवा की एक असली भूतिया कहानी – Gappu Ka Dhaba Bhutiya Kahani

Gappu Ka Dhaba Bhutiya Kahani : बहुत पुरानी बात है रीवा शहर के नेशनल हाईवे-73 के पास एक ढाबा था। इस ढाबा के मालिक का नाम गप्पू था इसलिए उसने अपने नाम पर ही ढाबे का नाम ‘गप्पू का ढाबा’ रखा था। वहाँ का खाना इतना स्वादिष्ट था कि जो भी रीवा आता वो उस ढाबे में खाना खाने ज़रूर जाता था। ढाबा दिन दूनी रात चौगुनी तरक़्क़ी कर रहा था। लेकिन उसके मालिक का घमंड भी बढ़ता ही जा रहा था।

Gappu Ka Dhaba Bhutiya Kahani
Gappu Ka Dhaba Bhutiya Kahani

गप्पू इतना घमंडी था की ढाबे का बचा खाने वो किसी ज़रूरत मंद इंसान या पशुओं को नही देता था बल्कि उसे फेंक देता था। एक दिन की बात है उसके ढाबे में एक भूखा भिखारी आकर गप्पू से खाने की भीख माँगता है लेकिन गप्पू उसे डाँट कर भगाने की कोशिश करता है। तब भिखारी कहता है मालिक मैं कई दिनों से कुछ नही खाया हूँ, बहुत भूख लगी है कुछ दे दो। लेकिन गप्पू उसे भगा देता है।

जैसे ही वो ढाबे के गेट पर पहुँचता है धड़ाम से ज़मीन में गिर जाता है और भूख के कारण वहीं उसकी मौत हो जाती है। गप्पू भिखारी को ज़मीन पर गिरता देख सोचा वो बेहोश होगा, तो वो अपने नौकरों को चिल्लाता है कि जाओ उस भिखारी को गेट से दूर फेंक दो।

जब गप्पू के नौकर भिखारी के पास जाते हैं तो देखते हैं कि उसकी मौत हो चुकी है। फिर वो गप्पू को बताते हैं तो गप्पू उन्हें बोलता है जाओ इसको जंगल के कुए में फेंक दो ताकि कोई देखे ना। नौकर मालिक की बात मान कर ऐसा ही करते हैं।

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उसके बाद से तो गप्पू के ढाबे के जैसे बुरे दिन शुरू हो गए। उस दिन के बाद उसकी कमाई धीरे-धीरे कम होने लगी और ग्राहक भी कम होने लगे। अगले दिन जब गप्पू शाम को ढाबा बंद कर अपने घर जा रहा था तो उसके सिर में पीछे से किसी से ज़ोर का चाँटा मारा जिससे वो ज़मीन पर गिर गया।

गप्पू उठा और इधर-उधर देखा और ज़ोर से चिल्लाया – कौन है, कौन है सामने क्यों नही आते। जब कोई नही दिखा तो अपने घर चला गया। घर में गप्पू अपनी पत्नी को खाना लगाने के लिए कहता है। जब उसकी पत्नी खाना लेकर आती है तो उसे भी कोई धक्का दे देता है, जिससे उसके हाथ में रखी थाली ज़मीन में गिर जाती है और खाना बर्बाद हो जाता है। ये देख कर गप्पू अपनी पत्नी पर चिल्लाता है, तब उसकी पत्नी उसे बताती है कि – लगता है किसी से उसे धक्का दिया था। ऐसे ही कई दिन बीतते चले गए और रोज़ नई मुसीबतें सामने आने लगी।

उसके ढाबे की कमाई और कम होती जा रही थी और ग्राहक दूर भाग रहे थे। ये सब देख कर गप्पू सोचा खाना ख़राब बनता होगा इसलिए उसने अपने नौकरों को बढ़िया खाना बनाने के लिए कहता है और फिर खाने को चेक करता है। खाना तो बिलकुल ठीक बन रहा था।

गप्पू के ढाबे में जो भी ग्राहक आता था उसे ‘भूखे भिखारी का भूत’ डराकर भगा देता था। भूखा भिखारी कभी किसी की प्लेट से रोटी ग़ायब कर देता, कभी दाल तो कभी सब्ज़ी या कुछ और, कभी-कभी तो ग्राहकों को डराने के लिए उनके ऊपर पानी डाल देता। जब ग्राहक देखता ही उसके पास कोई नही है ये सब अपने आप हो रहा है, तो वो डर के मारे दुम दबाकर ढाबे से भाग लेते थे।

अब तो ‘गप्पू का ढाबा’ को लोग भूतिया ढाबा कहना शुरू कर दिए थे। ऐसे ही महीना गुजर गया और गप्पू अब टेन्शन में बीमार होता जा रहा था और उसके ढाबे की कमाई ख़त्म हो गई थी। एक दिन गप्पू गल्ले से पैसा निकालने गया तो देखता है उसके गल्ले से सारे पैसे ग़ायब हैं और वहाँ पर भूखे भिखारी का सिर रखा है। ये देख कर वो ज़ोर से चिल्लाता है। मालिक के चिल्लाने की आवाज़ सुन कर उसके सभी कर्मचारी पास आ जाते हैं फिर एक जाके गल्ला में देखता है तो वहाँ सिर्फ़ पैसे थे भिखारी का सिर नही था।

यह सब देख कर ढाबे में काम करने वाले एक कर्मचारी ने गप्पू को बताया की हो सकता है उस भूखे भिखारी की आत्मा सबको परेशान करती हो। उसे गप्पू को पास के जंगल में रह रहे एक बाबा के बारे में बताता है। गप्पू उस बाबा के पास जाता है।

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वो बाबा अपने ध्यान और जादू-मंत्र से पता करके बताता है कि – ये उसके कर्मों का फल है। गप्पू ने जिस भिखारी को खाना नही दिया था उसकी भूख से मौत हो गई थी। इसलिए अब वो उसे परेशान कर रही है। इतना सुनते ही गप्पू सोने लगता है और बाबा से उसे बचाने की गुहार लगाता है।

फिर बाबा अपने मंत्र से भिखारी की आत्मा को बुलाता है और गप्पू उससे माफ़ी माँग कर वादा करता है कि आगे से अब उसके ढाबे में आने वाले सभी भिखारी को खाना देगा किसी को भूखा नही जाने देगा। ये सब सुन कर भूखे भिखारी का भूत शांत हो जाता है उसके बाद बाबा जी उसे अपने मंत्र शक्ति और गंगा जल से मुक्त कर देते हैं।

इसके बाद धीरे-धीरे गप्पू का ढाबा फिर से सही चलने लगता है और उसकी कमाई भी बढ़ने लगती है। अब गप्पू को समझ में आ जाता है इसलिए वो घमंड करना छोड़ देता है और ज़रूरत मंदों की मदद करता है, साथ ही उसके ढाबे में अगर कोई भिखारी आता है तो उसे खाना खिलता है। धीरे-धीरे गप्पू का ढाबा फिर से पॉप्युलर होने लगा और उसकी कमाई आसमान छूने लगी।

इस भूतिया कहानी ‘गप्पू का ढाबा और घमंडी मालिक – (Gappu Ka Dhaba Bhutiya Kahani)’ से हमें सीख मिलती है कि कभी भी घमंड नही करना चाहिए और ज़रूरत मंद की हमेशा मदद करनी चाहिए। आशा करते हैं कि आपको हमारी यह असली भूतिया कहानी पसंद आई होगी। इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया जैसे – फ़ेसबुक, WhatsApp इत्यादि में ज़रूर शेयर करें।

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