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तिलक मार्ग का भूत – असली भूत की कहानी ॰ The Ghost of Tilak Road – Horror Stories in Hindi

The Ghost of Tilak Road DelhiHorror Stories in Hindi : दोस्तो! “तिलक मार्ग का भूत” सच्ची घटना पर आधारित असली भूत की कहानी है। कृपया कमज़ोर दिल वाले इस भूतिया कहानी को अकेले और ख़ासकर रात में ना पढ़ें। आइए जानते हैं इसकी कहानी

कहानीकार Ⓒ ⓇDinesh Singh
लेखक और संपादकशिवानी मिश्रा
Ⓒ Copyright & All Rights Reserved ⓇHinduAlert

कई साल पहले जब दीपांशु मेहरा दिल्ली के तिलक मार्ग स्थित राजधानी कॉलेज में छात्र थे, तब वहाँ एक अफ़वाह थी कि तिलक मार्ग दिल्ली के सबसे प्रेतवाधित स्थानों में से एक है। जब दीपांशु ने एक ऑन-कैंपस पत्रिका शुरू की, तो वह उस क्षेत्र के कई प्रसिद्ध भूत की कहानियों के बारे में अपनी कॉलेज की मैगज़ीन में लिखने लगे। हालांकि, जब वो भूत की नई कहानी प्रकाशित करते थे, तो उनके मन में एक विशेष कहानी चलती रहती थी, वो थी – तिलक मार्ग का भूत की कहानी, जो सच्ची घटना पर आधारित थी। अब वो अपनी पत्रिका में उस भूतिया कहानी को भी पब्लिश करने वाले थे, लेकिन उससे पहले दीपांशु ने इसकी सच्चाई जाननी चाही।

The Ghost of Tilak Road Delhi - Horror Stories in Hindi
The Ghost of Tilak Road Delhi – Horror Stories in Hindi

लगभग 2-3 साल पहले शहर के इस हिस्से में एक युवक (सोहन) एक युवती (प्राची) को डेट कर रहा था। चूंकि लड़की के माता-पिता को उन दोनों का रिश्ता मंज़ूर नही था, इसलिए वह हर रात अंधेरे की आड़ में लड़की से मिलने जाता था।

अपने माता-पिता के सोने के बाद प्राची अपने घर से चुपके से निकल जाती और अपने माता-पिता की कार की तीन बार लाइट जलाती थी। तब उसका प्रेमी सोहन सड़क पर अपनी मोटरसाइकिल लेकर आ जाता था।

एक रात सोहन ने अपने घर के ठीक सामने थोड़ा तेज मोड़ लिया। इससे उसका ऐक्सिडेंट हो गया और वो अपनी बाइक से गिर गया और रोड के डिवाइडर से उसका सिर टकरा गया। उसके सिर में बहुत गहरी चोटें लगीं। वह इतना गंभीर था कि बच नहीं पाया, हॉस्पिटल में उसने दम तोड़ दिया।

उसके इस दुनिया से चले जाने के बाद आज भी माना जाता है कि वह अपने प्यार की तलाश में तिलक मार्ग रोड पर रात के समय अपनी उसी पुरानी बाइक में निकलता है और इधर-उधर भटकता है।

दीपांशु की शादी अब उसी लड़की प्राची से हो चुकी थी, जो पहले ऐक्सिडेंट में मारे गए लड़के सोहन से प्रेम करती थी। यह कहानी दीपांशु की पत्नी प्राची ने ही उन्हें बताई थी। जिज्ञासा बस दीपांशु और उनकी पत्नी प्राची सच पता करने के लिए एक रात वहाँ जाने का फैसला किया। वो दोनों जानना चाहते थे कि क्या ये सच है कि उसका प्रेमी आज भी रात में अपनी बाइक से आता है। प्राची इस बार से डर रही थी, कि वह उसे नुक़सान ना पहुँचाए।

दीपांशु और प्राची दोनों उसी स्थान पर अपनी कार पार्क कर दिए जहाँ पहले प्राची रात में कार की हेडलाइट जलाया करती थी। और रात के 12 बजने का इंतेज़ार करने लगे। इस बीच प्राची और दीपांशु डर भी रहे थे। वो सोच रहे थे, कि कहीं ये सच हुआ तो क्या होगा।

कहीं लोगों की कही बातें सच हुई तो? डर के मारे प्राची काँप रही थी। उस रात जैसे ही 12 बजे प्राची ने अपनी कार की हेडलाइट 3 बार जलाई। कुछ ही देर में उस सूनसान घनी काली अँधेरी रात में एक बाइक सामने से आती दिखी। जिसकी तेज़ रोशनी दूर से ही देखी जा सकती थी।

बाइक की लाइट देख कर दोनों की हालत ख़राब हो चुकी थी, अब वो दोनों वहाँ से तुरंत जाने का निर्णय लेते हैं। जैसे ही वो कार स्टार्ट करके मेन रोड पर आते हैं, उनके सामने कुछ ही दूरी पर बाइक उनकी तरफ़ आ रही थी।

वो साफ़ देख सकते थे की बाइक तो चल रही है, लेकिन उसको चलाने वाला दिखाई नही दे रहा। इसके बाद दीपांशु ने अपनी कार की हेडलाइट जला दी और वहाँ से तेज़ गति से आगे जाने ही वाले थे कि सामने दिख रही बाइक वहाँ से ग़ायब हो चुकी थी।

उसके बाद दोनों डरते हुए इधर-उधर देखने लगे, लेकिन अब उन्हें वहाँ पर कुछ भी दिखाई नही दे रहा था। वो दोनों अब वहाँ से चलने वाले थे की ऐसा लगा मानों उनकी कार के ऊपर कोई कूद गया हो। दीपांशु ने अब 1 सेकंड में वहाँ रुकना सेफ़ नही समझा और तुरंत कार की स्पीड बढ़ा कर आगे बढ़ने लगा।

कुछ दूर जाने के बाद जब कार के साइड मिरर पर तेज़ी से उनकी तरफ़ आती बाइक दिखी, तो अब दीपांशु और प्राची डर के मारे पसीने से तर-बतर हो चुके थे। कुछ ही पल में दीपांशु को सामने एक हॉस्पिटल का बोर्ड दिखाई दिया, तो दीपांशु ने कार की स्पीड बढ़ा कर सीधा हॉस्पिटल के अंदर ही जाकर रुका और फिर दोनों तुरंत कार से बाहर आकर हॉस्पिटल के अंदर की तरफ़ भागे।

हॉस्पिटल के अंदर जाते ही वो बाइक अब दिखाई देनी बंद हो गई थी। उसके बाद दोनों ने हॉस्पिटल के स्टाफ़ को पूरी कहानी सुनाई और उनसे रात में वहीं रुकने देने की रिक्वेस्ट की। हॉस्पिटल स्टाफ़ उन दोनों को रात में वही रुकने की permission दे देता है। और जब सुबह हुई, तो दीपांशु और प्राची दोनों डरते हुए अपनी कार के पास आए और आस पास भीड़ को देख कर अपनी कार में बैठ कर सीधा अपने घर को निकल गए। उसके बाद उन दोनों ने कभी भी रात के समय तिलक मार्ग में जाने की हिम्मत नही की। अगले दिन जब कॉलेज खुला तो दीपांशु ने पूरी कहानी अपनी कॉलेज पत्रिका में प्रकाशित की।

दोस्तो, यह थी आज कि तिलक मार्ग का भूतअसली भूत की कहानी हिंदी में (The Ghost of Tilak Road, DelhiHorror Stories in Hindi), हमें उम्मीद है आपको यह असली भूतिया कहानी पसंद आएगी।

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अब मैं शिवानी मिश्रा, इस कहानी को समाप्त करती हूँ और इस कहानी को पढ़ने के लिए आपको धन्यवाद करती हूँ! ऐसी ही कुछ और हिंदी कहानियाँ (Hindi Kahaniyan) पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें – Stories in Hindi.

Web Title : The Ghost of Tilak Road DelhiHorror Stories in Hindi.

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