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2 गरीब अनाथ बच्चे हिंदी कहानी (Hindi Kahani 2 Garib Anath Bachche) | Hindi Kahaniyan | Hindi Story

Hindi Kahani 2 Garib Anath Bache : घने जंगलों से लगा हुआ नदी के किनारे एक गाँव बसा था, जिसका नाम सीतापुर था। सीतापुर की आबादी क़रीब 500 की रही होगी। उस गाँव में कई परिवार हंसी-ख़ुशी मिल-जुल कर रहते थे। इन्हीं परिवारों में से एक थे बहोरी लाल जिनकी पत्नी का नाम लाल कली था। इन दोनों के 2 बच्चे थे एक लड़का और एक लड़की। जिनका नाम जय और संजना था।

बहोरी लाल और उनकी पत्नी लाल कली गाँव में ही खेती-बाड़ी और पशुपालन का काम करके अपनी रोज़ी-रोटी चलाते थे और उनका पूरा परिवार हंसी-ख़ुशी से रहता था। ये सब कुछ बिल्कुल सामान्य रूप से चल रहा था, कि एक दिन अचानक गाँव की नदी में जैसे सुनामी आ गई। नदी का पानी पूरे गाँव में भर गया जिससे सुनामी जैसे हालत हो गए। बहुत भयानक बाढ़ आ गई, गाँव में चारों-तरफ़ पानी के सिवा कुछ नही दिखता था। गाँव के ज़्यादातर घर पानी में डूब गए।

Hindi Kahani 2 Garib Anath Bachche
Hindi Kahani 2 Garib Anath Bachche

जो लोग अपने आप को बचा सकते थे वो भाग कर गाँव के पास के पहाड़ के ऊपर शरण ले लिए। लेकिन कई परिवार के लोग और पशु नदी की सुनामी में बेवस नज़र आए। अब उनका इस भयानक बाढ़ से बच कर निकल पाना मुश्किल हो गया था। उन्हीं में से एक थे बहोरी लाल और उनका पूरा परिवार।

बाढ़ की वजह गाँव के लोग बह रहे थे, जान-माल का भारी नुक़सान हुआ था। जय और संजना भी बाढ़ के पानी में बह रहे थे, उन दोनों का कोई सहारा नही था, इसलिए दोनों रो रहे थे। दोनों बच्चे बहते हुए एक गाँव बरौ पहुँच गए, उस गाँव में भी बाढ़ का पानी भरा हुआ था। दोनों बच्चे बच तो गए लेकिन माता-पिता को साथ ना पाकर दोनों बहुत दुखी थी, वो अकेला पन महसूस कर रहे थे।

नदी के किनारे दोनों बच्चे अभी भी पानी में खड़े सोच रहे थे। तभी संजना ने जय से कहा – भाई, अब हम कहा जाएँगे, कहाँ रहेंगे और खाएँगे क्या? मम्मी-पापा का भी पता नही। ऐसे तो हम भूख-प्यास से मर जाएँगे। तभी जय रोने लगता है और कहता है- दीदी तुम तो ऐसा मत कहो, तुम्हारे सिवा मेरा है ही कौन?

दोनों अभी नदी के पानी में ही थे की उनकी तरफ़ एक नाव आइ जिसमें एक औरत थी और वो अपने साथ खाना-पीना भी रखा था। उस औरत ने दोनों बच्चों से बात की और उनको अपनी नाव में बुला लिया फिर नाव में रखे चूल्हे में आग जला कर खाना बनाई और दोनों को खिलाई। दोनों बच्चे खाना खाकर उसी नाव में सो गए। धीरे-धीरे नाव आगे बढ़ती गई और कुछ समय बाद एक जंगल के समीप रुकी।

वो औरत और बच्चे नाव से उतरे और उस जंगल में उन्हें आस पास फल-फूल दिखाई दे रहे थे, तो और औरत ने बच्चों से कहा हमारे पास अब कुछ की दिन का खाना बचा है। इसलिए हम लोग यही रुकते हैं और यहाँ के फलों से अपना पेट भरेंगे। एक रात वहाँ बिताने के बाद वो तीनों आस पास घूमने जाते है तो उन्हें पास में एक गाँव दिखाई देता है।

औरत ने बच्चों से कहा – अब हम इसी गाँव में रहेंगे और जंगल की लकड़ी और फल बेच कर अपना गुज़ारा करेंगे। कुछ दिन ऐसे ही बीत गए एक दिन वो औरत जंगल फल और लकड़ी लेने चली गई थी। तभी जय और संजना घूमते-घूमते कहीं दूर निकल गए। शाम हो गई थी, दोनों थक चुके थे, उन्हें पास में दुकान के सामने रखी टेबल दिखी तो वही बैठ गए। कुछ देर में दोनों को अचानक से नींद आ गई। सोते-सोते सुबह हो गई।

सुबह जब दुकान की मालकिन आई तो दोनों को जगाई और वहाँ से भगा दी। कुछ दूर जाने पर अचानक से जय बेहोश हो कर गिर गया। ये देख संजना रोने लगी और उसके पास जाकर उसे उठाने की कोशिश कर रही थी लेकिन सब फेल था। जय बुख़ार और कमजोरी की वजह से बेहोश हो गया था।

तभी उनके पास एक आदमी आया और संजना से पूछा क्या हुआ। संजना ने सब कुछ बताया। उसके बाद वो आदमी जय को हॉस्पिटल लेके गया और इलाज कराया। और दोनों को पेट भर खाना भी खिलाया था। उसके बाद दोनों को अनाथ समझ कर अपने घर ले आया।

जब उस आदमी की पत्नी रीता ने अनजान बच्चों को देखा तो अपने पति पर ग़ुस्सा हुई तब उस आदमी ने कहा रीता हमारे भी तो कोई बच्चा नही है। क्या हम इन अनाथों के माता-पिता नही बन सकते। पति के बहुत समझाने के बाद वो जय और संजना को अपने घर में रखने को मान गई।

वो बच्चों को अपने घर में तो रहने दी लेकिन उनसे ज़रा सा भी प्यार नही करती थी। बात-बात पर डाँटती-मारती थी। एक दिन उस आदमी का पति किसी काम से शहर चला गया। उसके अगले दिन रीता को बहुत तेज बुख़ार आया। जब संजना और जय ने रीता की हालत देखी तो उसकी बहुत सेवा की। संजना एक काढ़ा बनाना जानती थी, तो उसने वो बनाया और रीता को पिला दिया। धीरे-धीरे रीता ठीक होने लगी लेकिन अभी भी उसको बहुत कमजोरी थी।

3-4 दिन बाद जब उसक पति आया तो दोनों बच्चों ने सब कुछ बताया। वो तुरंत रीता को लेकर हॉस्पिटल गया। हॉस्पिटल में डॉक्टर ने चेक करके बताया की उसकी पत्नी माँ बनने वाली है। ये सुन कर दोनों के होश उड़ गए और उनके आश्चर्य का ठिकाना नही था क्योंकि डॉक्टर ने पहले बताया था कि रीता का गर्भाशय ब्लॉक होने की वजह से वो कभी मां नही बन सकती।

जब उस आदमी ने डॉक्टर से संजना के बनाए काढ़े के बारे में बताया तो डॉक्टर ने बच्ची से पूछा – बेटी आपने ये काढ़ा बनाना कहाँ से सीखा और इसमें क्या मिलाया था? तब संजना ने बताया की उसके दादा-दादी ये काढ़ा बनाते थे और कहते थे की इस काढ़े से बहुत से बीमारियाँ दूर हो जाती हैं।

उसके बाद रीता ने संजना और जय से माफ़ी माँगी और कहा संजना तुम्हारी वजह से मेरे में बच्चा होगा। तुम्हारा एहसान मैं कभी नही भूलूँगी। अब मेरे बच्चे होने के बाद भी तुम दोनों से अपने बच्चों की तरह प्यार करूँगी। फिर उसने संजना और जय को गले से लगा लिया।

उसके बाद दोनों बच्चे, रीता और उसका पति अपने घर आ जाते हैं और सभी लोग मिलजुल कर हंसी ख़ुशी रहने लगते हैं।

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