Positive India

चेन्नई की कम्यूनिटी ने तमिलनाडु में 65,000 पेड़ लगाकर 25 मियावाकी वन उगाएं ॰ Hindi Kahaniyan ॰ Positive India – Stories in Hindi

Hindi KahaniyanPositive IndiaStories in Hindi : जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी (Akira Miyawaki) ने 1980 के दशक में मियावाकी जंगलों (Miyawaki forests) की अवधारणा की परिकल्पना की थी। इस तकनीक में एक छोटे से क्षेत्र में झाड़ियों, पेड़ों और कैनोपीज़ के साथ घने जंगल उगाना शामिल है। घनी रूप से रोपित वनस्पति अपने प्राकृतिक विकास पैटर्न के अनुसार वर्षों के बजाय महीनों में तेजी से बढ़ती है।

लेकिन हाल के वर्षों में ही इस अवधारणा को व्यापक स्वीकृति मिली है। कई निजी समूहों, व्यक्तियों, वन विभागों और सरकारी अधिकारियों ने इस पद्धति को अपनाया और प्रयोग किया है, इस तकनीत से जंगल उगाने पर जलवायु संकट को कम करने में मदद मिलती है।

Hindi Kahaniyan - Chennai Community Grow 25 Miyawaki Forests
Hindi Kahaniyan – Chennai Community Grow 25 Miyawaki Forests

इसी तरह, चेन्नई स्थित एक कम्यूनिटी ने महान मियावाकी की अवधारणा का उपयोग करके शहर में कई हरे जंगल उगा दिए। आम जनता ने अपने कॉलेज के दिनों में वृक्षारोपण अभियान शुरू किया लेकिन शहर में तेजी से घटते वन आवरण ने उन्हें चिंतित कर दिया। एक त्वरित समाधान खोजने के लिए उन्होंने 65,000 देशी पेड़ों लगाकर 25 मियावाकी वन लगाए। यह जंगल 9.2 एकड़ भूमि में लगाए गए हैं।

अपने एनजीओ थुवक्कम के माध्यम से जिसका अर्थ तमिल में ‘शुरुआत’ है, उन्होंने शहर और इसके बाहरी इलाके में छोटे-छोटे हरे-भरे जंगल बनाए हैं, जो स्थानीय जैव विविधता के लिए एक सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करता है।

एनजीओ के संस्थापक और सीईओ कृष्णकुमार एस ने अपनी अब तक की यात्रा को आगे बढ़ाते हुए कहा, “2014 में, social work में स्नातकोत्तर (post-graduation) के हमारे अंतिम वर्ष के दौरान, छह दोस्तों और मैंने अपने कॉलेज परिसर और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान शुरू किया। हम सभी की सोच एक जैसी थी, सभी लोग अपने आस-पास हरियाली को बढ़ाने की इच्छा रखते थे।”

27 वर्षीय कृष्णकुमार एस ने बताया कि दोस्तों के समूह ने दूसरों को प्रेरित करने की दिशा में काम करने से पहले अभ्यास करने का फैसला किया। “हमने खाली जगहों की पहचान की और ज़िला प्रशासन से अनुमति मांगी और अपने काम के माध्यम से दूसरों को प्रेरित करने की उम्मीद में वृक्षारोपण अभियान शुरू किया।

दुर्भाग्य से चेन्नई में 2016 में चक्रवात वरदा आ गया जिससे बड़े पैमाने पर हमारे लगाए जंगल ख़त्म हो गए, पेड़ उखड़ गए, यहाँ के घरों को भी नुक़सान हुआ, मानव जीवन को बाधित कर दिया और शहर में बाढ़ आ गई। इस तबाही ने आस-पास की हरियाली और पेड़ों को भी बहुत नुकसान पहुंचाया, जिससे हमारी टीम के युवा भी निराश हो गए थे। क्योंकि हमारी पूरी मेहनत बर्बाद हो चुकी थी, यह हमारे लिए एक सदमे जैसा था।

ख़त्म हो चुकी हरियाली को फिर से बहाल करने की आवश्यकता थी। संयोग से, हमें मियावाकी वन तकनीक के बारे में जानकारी मिली और फिर हमने मियावाकी वन तकनीत से जंगल लगाने के लिए प्रयोग करने का फैसला किया।

उन्होंने आगे कहा कि समूह ने इंटरनेट से लेख पढ़े, तकनीक पर शोध किया और फिर उन्हें अपनाने का फैसला किया। हमने पुलिस विभाग, स्थानीय निकायों और अन्य सरकारी एजेंसियों से शहरी क्षेत्र में भूखंडों को उधार देने का अनुरोध करते हुए अनुमति मांगी। ये स्थान खाली थे और संभावित मिनी वनों के रूप में काम कर सकते थे। इस तरह हमारी पहली परियोजना एक स्कूल में 200 वर्ग फुट का क्षेत्र में थी।

कृष्णकुमार कहते हैं कि 200 वर्ग फुट के छोटे क्षेत्र का उपयोग हमारे प्रयोग के लिए किया गया था और यदि हम सफल होते हैं, तो यह जिला प्रशासन और सरकारी अधिकारियों को इसी तरह के काम पूरे शहर में करने के लिए मनाना आसान हो जाएगा और स्कूल वाला प्रयोग एक प्रदर्शन (demonstration) के रूप में कार्य करेगा।

Web Title : Hindi KahaniyanPositive IndiaStories in Hindi : Chennai Community Grow 25 Miyawaki Forests and 65,000 Trees Planted in Across Tamil Nadu.

Leave a Reply