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ईमानदार लकड़हारा एक प्रेरक हिंदी कहानी | Honest Woodcutter a Moral Hindi Story | Moral Story in Hindi | Hindi Kahani

Honest Woodcutter a Motivational Hindi Story (ईमानदार लकड़हारा एक प्रेरक हिंदी कहानी)

एक जंगल के पास के गाँव में दो लकड़हारा रहते थे। वे एक दूसरे के पड़ोसी थे। पहला लकड़हारा गोपाल बहुत ऊर्जावान और ईमानदार व्यक्ति था जबकि दूसरा लकड़हारा लाला आलसी और मतलबी व्यक्ति था। दोनों पास के जंगल में लकड़ियां काटकर अपना और अपने परिवार का गुजारा करते थे।

एक दिन हमेशा की तरह गोपाल सुबह उठा और अपना काम शुरू किया। लाला ने गोपाल को देख कर आह भरते हुए कहा – अरे यार इसने तो सुबह से ही शुरु कर दिया। आलस की वजह से वो सोचा कुछ देर बाद शुरू करूँगा। लाला दयनीय और अति ग़रीबी वाला जीवन व्यतीत कर रहा था क्योंकि वह कड़ी मेहनत करने की हिम्मत नही कर पाता था। अपनी तैयारी करने के बाद गोपाल जंगल में गया और सुखी लकड़ी की तलाश करने लगा। लेकिन उसे वहाँ पर कोई अच्छी लकड़ियाँ नहीं मिलीं इसने उसने नदी के किनारे जाने का निर्णय लिया ताकि उसे अच्छी लकड़ी मिल सकें।

Honest Woodcutter a Moral Hindi Story, ईमानदार लकड़हारा एक प्रेरक हिंदी कहानी
Honest Woodcutter a Moral Hindi Story, ईमानदार लकड़हारा एक प्रेरक हिंदी कहानी

वहाँ उसे एक बड़ा सा सूखा पेड़ मिला गोपाल उस पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काटने लगा। वह लकड़ी काट ही रहा था कि अचानक से उसकी कुल्हाड़ी उसके हाथ से छूट कर नदी में गिर गई। गोपाल सोच में पड़ गया – अरे नहीं, मुझसे क्या हो है? कुल्हाड़ी ही मेरी संपत्ति थी, उसके बिना अब मैं क्या करूँगा, काम कैसे करूँगा?

इतना सोच कर वो भगवान से विनती करने लगा – हे भगवान! कृपा करिए, मेरी मदद करिए! भगवान उसकी मेहनत से खुश थे इसलिए उन्होंने उसकी प्रार्थना सुनी और प्रकट होकर उस से पूछा – क्या हुआ पुत्र? क्यों परेशान हो?

रामू ने कहा प्रभु! मेरी कुल्हाड़ी हाथ से फिसल कर नदी में गिर गई है, कृपया मेरी सहायता करिए।
भगवान ने कहा – चिंता मत करो, मैं तुम्हें कुल्हाड़ी अभी लौटा दूंगा।
भगवान ने उस नदी से एक कुल्हाड़ी निकाली जो सोने कि थी। और गोपाल से कहा – लो अपनी कुल्हाड़ी।
सोने की इतनी चमकीली कुल्हाड़ी देखकर गोपाल हैरान हो गया और भगवान से हिचकिचाते हुए कहा – नहीं प्रभु यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है।

भगवान ने नदी से फिर एक कुल्हाड़ी निकाली जो चांदी का था। और गोपाल से कहा – अब लो ये तुम्हारी कुल्हाड़ी।
तभी गोपाल ने कहा – प्रभु ये भी मेरी नही है।
फिर भगवान ने नदी से गोपाल की लोहे की कुल्हाड़ी निकाली और कहा ये तो है ना तुम्हारी।
तभी गोपाल उस कुल्हाड़ी को भगवान से ले लिए और शुक्रिया कहा।

इसके बाद भगवान ने गोपाल से कहा – पुत्र मैं तुम्हारी ईमानदारी से बहुत खुश हूँ। ये तीनों कुल्हाड़ियों अब तुम्हारी हैं ये लो। इसके बाद सोने, चाँदी और लोहे की तीनों कुल्हाड़ी गोपाल को देकर भगवान ग़ायब हो गए।

उसके बाद गोपाल ने जंगल से लकड़ी काटी और तीनों कुल्हाड़ी को लेकर शाम को अपने घर चल दिया। जब लाला ने गोपाल की तीनों कुल्हाड़ी देखी तो दंग रह गया और उसने पूछा कहा से मिली ये? फिर गोपाल ने पूरी कहानी बताई। उसके बाद गोपाल ने सोने और चाँदी की कुल्हाड़ी बेच कर बेहतर जीवन बिताने लगा।

वहीं दूसरी तरफ़ लाला ने भी गोपाल की तरह करने का फ़ैसला किया और जंगल चला गया। उसके बाद लाला ने नदी के किनारे पेड़ में चढ़ कर लकड़ी काटने लगा और जान बूझ कर अपनी कुल्हाड़ी नदी में गिरा दी। फिर भगवान से प्रार्थना करने लगा – हे भगवान मेरी मदद करिए! तभी नदी में भगवान प्रकट हुए और कहा बताओ पुत्र क्यों परेशान हो?

लाला ने भगवान को बताया की उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है। भगवान लाला के मन की बात जान चुके थे, इसलिए उन्होंने नदी से उसकी लोहे की कुल्हाड़ी निकाली और कहा लो पुत्र अपनी कुल्हाड़ी। तो लाला ने कहा – नही प्रभु, ये मेरी नही है।

फिर भगवान ने चाँदी की कुल्हाड़ी निकाली और कहा ये लो तुम्हारी कुल्हाड़ी। इसके बाद भी लाला ने कहा – नही ये भी नही है मेरी। इसके बाद भगवान ने सोने की कुल्हाड़ी निकाली और पूछा क्या ये है तुम्हारी कुल्हाड़ी? तब लाला ने लालच में भगवान से कहा – हाँ प्रभु! यही है मेरी कुल्हाड़ी।

भगवान अब लाला के ऊपर क्रोधित हो चुके थे। उन्होंने उसे कहा – तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझसे झूठ बोलने की। तुम्हें इस झूठ की सजा मिलेगी। इसके बाद भगवान और तीनों कुल्हाड़ी ग़ायब हो गए। इसके बाद लाला भगवान से विनती करता रहा। हे भगवान! मुझे माफ़ कर दीजिए। मेरी कुल्हाड़ी लौटा दीजिए। लेकिन अब उसका विलाप करना व्यर्थ हुआ।

अब लाला बिना कुल्हाड़ी के घर लौट आया जो उसकी एकमात्र संपत्ति थी। अब उसने सबक सीख लिया था और आगे से मेहनत करने काम करने और पैसा कमाने का निर्णय लिया और खुद से वादा किया की कभी झूठ नही बोलेगा। इसके बाद लाला भी गोपाल की तरह मेहनत करके अपना जीवन यापन करने लगा। अब गोपाल और लाला दोनों साथ में जंगल लकड़ी काटने जाते हैं और खूब मेहनत करके काम करके जीवनयापन करते हैं।

कहानी सार (Moral of Honesty is the Best Policy Hindi Story) : ईमानदार लकड़हारा एक प्रेरक हिंदी कहानी (Moral Story in Hindi) से हमें सीख मिलती है की कभी भी झूठ का सहारा नही लेना चाहिए। ईमानदारी हमेशा लाभदायक होती है। अगर आप ईमानदारी बने रहेंगे तो आपको बहुत लाभ होगा।

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