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रैनी गाँव में भूतों का हॉस्पिटल ॰ Horror Story in Hindi – Ghost Hospital in Raini Village

Horror Story in HindiGhost Hospital in Raini Village ॰ रैनी गाँव में भूतों का हॉस्पिटल, रात को सुनाई देती हैं डरावनी आवाज़ें : दोस्तो, यह सच्ची घटना पर आधारित एक असली भूतों की कहानी है, अगर आप कमज़ोर दिल वाले हैं तो कृपया इस कहानी को रात में अकेले पढ़ने की ग़लती ना करें।

1982 में बनाए गए गाँव के इस प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को भूतों का हॉस्पिटल माना जाता है। यहाँ रात में में डरावनी आवाज़ें सुनाई देती हैं। इस हॉस्पिटल का ख़ौफ़ ना सिर्फ़ इंसानों बल्कि पशु-पक्षियों में भी है। इसकी दीवारों पर कोई पक्षी तक नही बैठता। 1982 में इस हॉस्पिटल के बनने के बाद ही अजीबो-ग़रीब डरावनी घटनाएँ होनी शुरू हो गई थी।

भूत प्रेत की कहानियाँ हम सब लोग अपने बचपान से ही अक्सर अपने नाना-नानी, दादा-दादी के साथ पत्रिकाओं में सुनते आ रहे हैं। लेकिन इस लेख में हम आपको जिस भूतिया कहानी के बारे में बताने वाले हैं वो किसी कहानी का हिस्सा नही बल्कि सच्चाई है जो कि मऊ जिले के रैनी गाँव में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है।

Horror Story in Hindi - Ghost Hospital in Raini Village
Horror Story in Hindi – Ghost Hospital in Raini Village

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हॉस्पिटल से रात में ऐसी भयानक डरावनी आवाज़ें आती हैं, कि इसके पास रहने वालों को डर के मारे सोना मुश्किल हो जाता है। डर का माहौल इतना ज़्यादा है कि लोग इसके पास जाकर ये जानने की भी कोशिश नही करते कि रात में आने वाले कराहने जैसी डरावनी आवाज़ें किसकी है। आइए आपको बताते हैं इसकी असली भूतिया कहानी :-

असली भूतिया कहानी, भूतों का हॉस्पिटल – Horror Stories in Hindi

Ghost Hospital in Raini Village ॰ Horror Story in Hindi : यह असली भूतिया कहानीभूतों का हॉस्पिटल‘ मऊ जिले के परदहा ब्लॉक में आने वाले रैनी गाँव की है। यहाँ कई दशकों पहले स्थनीय लोगों के इलाज के लिए एक प्राथमिक स्वास्थ्य बनाया गया था, जो आज किसी खंडहर की तरह लगता है। लोग दिन में भी इस हॉस्पिटल के पास से गुज़रने से डरते हैं।

इसके खंडहर के चारों तरफ़ आज सिर्फ़ झाड़ियाँ हैं। झाड़ियों के बीच स्थित इस हॉस्पिटल का खंडहर देखने में भी डरावना लगता है। घनी झाड़ियों के बीचों-बीच स्थित होने के बाद भी इस खंडहर जैसे हॉस्पिटल की तरफ़ जाने का रास्ता इतना साफ़ रहता है मानो कोई यहाँ दिन में 4 बार सफ़ाई करता हो। लेकिन स्थनीय लोग कहते हैं कि यहाँ सालों से कोई साफ़-सफ़ाई नही करता।

गाँव के लोग बताते हैं कि दिन के 12 बजे भी कोई इस हॉस्पिटल के पास से गुज़रने की हिम्मत नही करता, अगर कोई ग़लती से चला गया तो उसकी हालत ख़राब हो जाती है। अगर मजबूरी में किसी को इस हॉस्पिटल के पास जाना भी पड़ता है, तो लोग अकेले नही जाते बल्कि झुंड बना कर जाते हैं।

लोग कहते हैं कि कभी कभी तो ऐसे लगता है जैसे हॉस्पिटल में बहुत भीड़ हो, कराहने और रोने की आवाज़ें आती रहती हैं। इस हॉस्पिटल का ख़ौफ़ सिर्फ़ इंसानों में ही नही बल्कि पशु-पक्षियों में भी है। कोई भी पक्षी इस हॉस्पिटल की खंडहर की दीवारों में भी नही बैठता।

शाम ढलते ही लोग इस हॉस्पिटल के पास से गुज़रने वाली रोड से आना-जाना छोड़ देते हैं। लोग हॉस्पिटल के भूतों से इतना डरते हैं कि कभी भूल कर भी यहाँ से नही गुज़रते। कहते हैं कि यहाँ से गुज़रने वाले पर रूह का साया पड़ जाता है।

गाँव के लोग बताते हैं कि जैसे ही रात के 12 बजते हैं, इस हॉस्पिटल से उल्लुओं के रोने की आवाज़ें आनी शुरू हो जाती है। इसके साथ लोगों की कराहने और रोने की आवाज़ें भी लगातार आती रहती हैं। आवाज़ें इतनी डरावनी और खतरनाक होती हैं, कि ऐसा लगता है जैसे किसी ने पिघला काँच कान में डाल दिया हो।

सूरज ढलते ही लोगों में भय व्याप्त हो जाता है, लोग बस सोचते हैं कि कैसे भी करके जल्दी से रात कट जाए क्योंकि हॉस्पिटल से आने वाली आवाज़ें बहुत भयानक होती हैं। फिर भी वहाँ के ग़रीब लोग इतने मजबूर हैं कि वो अपना घर और गाँव छोड़ कर नही जा सकते।

कई लोगों ने तो रात के समय हॉस्पिटल की खिड़की से रोशनी भी देखी है। हॉस्पिटल से इतनी भयानक आवाज़ें आती हैं फिर भी आज तक किसी की हिम्मत नही हुई कि वो वहाँ जाकर देखे और इसकी पड़ताल कर सके।

गाँव वाले बताते हैं कि जिस रात इस हॉस्पिटल से रोने की आवाज़ें आती हैं, उसके अगले दिन पूरे गाँव में क़ब्रितान जैसे सन्नाटा छाया रहता है। हर कोई इस बात से डरता है कि किसी के साथ कोई घटना ना हो जाए।

भूतों के हॉस्पिटल का सच ॰ Horror Story in Hindi

रैनी गाँव के 75 वर्षीय केदार ने बताया की इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कई दशक पहले स्थनीय लोगों के इलाज के लिए बनाया गया था, लेकिन किसी को इस बात का अंदाज़ा नही था की यह हॉस्पिटल ज़िंदा लोगों का नही बल्कि मुर्दों के इलाज का हॉस्पिटल बन जाएगा।

केदार ने बताया की काफ़ी समय पहले गाँव के 2 ज़मीदारों के बीच आपसी रंजिश में बहुत लड़ाई हुई थी, तो उसमें से एक ज़मीदार की मौत समय पर इलाज ना होने की वजह से हो गई थी। उसकी मौत के कुछ दिन बाद ही गाँव के लोगों ने उस ज़मीदार को उसी स्थान पर बैठे देखा, जहाँ पर उसकी मौत हुई थी। स्थानीय लोग कहते हैं कि वो किसी को कुछ नही बोलते ना ही किसी को नुक़सान पहुँचाते लेकिन बीच-बीच में बचाव-बचाव की डरावनी आवाज़ें आती रहती हैं।

फिर भी किसी की आज तक हिम्मत नही हुई की कोई उन जगह पर जाकर देखे, की आख़िर कौन चिल्ला रहा है। उस ज़मींदार की मौत होने के कुछ दिन बाद ही उनका पड़ोसी भी गाँव छोड़कर कहीं चले गए और आज तक उनका अता-पता नही है ना ही उनके परिवार को कोई इंसान दोबारा यहाँ आया। उसके बाद भी दोनों ज़मीदारों के परिवारों के कई मौतें आपसी पारिवारिक बदले में हुई लेकिन उनमे से कोई किसी को नही दिखाई देता, सिर्फ़ मुख्य ज़मींदार ही कभी-कभी दिखाई देते हैं।

उसके बाद 1982 में इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बनाया गया था, लेकिन इसके बनने के बाद ही इसमें रात के समय डरावनी आवाज़ें आनी शुरू हो गई। लेकिन शुरू में लोगों ने इसको नज़र-अन्दाज़ किया लेकिन धीरे-धीरे यह बढ़ता ही गया तब लोगों में डर भी पैदा होने लगा, अब तो हालात ये है की कोई इसके नज़दीक भी नही जाता जिससे ये खंडहर बन चुका है।

सबसे बड़ी बात ये है जिस स्थान पर हॉस्पिटल बनाया गया है वहीं पर ज़मींदार का अंतिम संस्कार हुआ था, इसीलिए लोग मानते हैं कि अब इस हॉस्पिटल में ज़मींदार की रूह वास करती है और किसी को इसमें जाने नही देती।

शुरू में यहाँ कई कर्मचारी और सप्ताह में डॉक्टर भी आते थे, लेकिन शाम को जब सब चले जाते थे तो इसका दरवाज़ा अपने आप खुलता बंद होता था। शुरू में तो लोगों ने सोचा की कर्मचारियों ने ग़लती से दरवाज़ा खुला खोल छोड़ दिया होगा, इसके लिए लोगों ने कर्मचारियों को भी ये बात बताई। लेकिन बड़ी बात तो ये थी की सुबह जब कर्मचारी आते थे, तो दरवाज़ा बंद मिलता था इसलिए वो लोगों की बातों में विश्वास नही करते थे।

लेकिन कुछ दिनों बाद यहाँ से रात के समय डरावनी आवाज़ें आने लगी, कभी-कभी तो तेज़ रोने की आवाज़ें आती थी। समय से साथ ऐसी घटनाएँ और बढ़ने लगे। कुछ समय बाद तो दिन में ही कर्मचारियों के सामने कुछ आजीब घटनाएँ होने लगीं, जब ये सब ज़्यादा बढ़ने लगा तो हॉस्पिटल के कर्मचारी और डॉक्टर भी परेशान होकर डर की वजह से यहाँ आना बंद कर दिए।

उसके बाद से यह हॉस्पिटल धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता चला गया। इस हॉस्पिटल के सारे मेडिकल उपकरण अंदर इधर-उधर बिखरे पड़े हैं। गाँव के लोगों का मानना है कि इस सामानों से रूहों का इलाज किया जाता है।

आज भी कर्मचारी आते हैं लेकिन भूत के डर से हॉस्पिटल नही जाते

गाँव के सरपंच (प्रधान) मुकेश राय ने बताया की अभी यहाँ पर ड्यूटी में लगाई गई नर्स गाँव तो आती हैं, लेकिन भूत के डर से हॉस्पिटल नही जाती है। पड़ताल करने पर देखा गया कि इस हॉस्पिटल के स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर लगे ताले में जंग लग चुकी थी, साथ ही आस पास लोगों ने मलमूत्र किया हुआ था। गंदगी के कारण हॉस्पिटल तक जाने वाले रास्ते में जाना भी मुश्किल था।

निष्कर्ष ॰ रैनी गाँव में भूतों का हॉस्पिटल (Horror Story in Hindi)

दोस्तो, यह थी आज कि रैनी गाँव में भूतों का हॉस्पिटल (Horror Story in HindiGhost Hospital in Raini Village), हमें उम्मीद है आपको यह भूतिया कहानी पसंद आएगी। अगर आपको हमारी यह रैनी गाँव में भूतों का हॉस्पिटल असली भूतिया कहानी (Real Horror Story in Hindi) पसंद आई हो, तो इसे सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, Twitter, WhatsApp, Koo, Telegram इत्यादि में अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूलें।

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अब मैं शिवानी मिश्रा, इस कहानी को समाप्त करती हूँ और इस कहानी को पढ़ने के लिए आपको धन्यवाद करती हूँ! ऐसी ही कुछ और हिंदी कहानियाँ (Hindi Kahaniyan) पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें – Kahaniyan.

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