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जंगल की हवेली चार दोस्तों की डरावनी भूत की कहानी पार्ट 1 ॰ Hindi Horror Story Jungle Ki Heveli & Four Friends Part 1

Horror Stories in Hindi : Jungle Ki Heveli & Four Friends Part 1 Hindi Horror Story ॰ जंगल की हवेली चार दोस्तों की डरावनी कहानी पार्ट 1 – भूत की कहानी हिंदी में

दोस्तों आज मै आप लोगों के लिए एक नई भूतिया कहानी (Horror Story in Hindi) लेकर आई हूँ। भूत की यह कहानी चार दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक वीरान जंगल में घूमने के लिए जाते हैं और वहाँ जाने के बाद उनका सामना ऐसी घटनाओं से होता है, जिसके बारे में कोई कल्पना भी नही कर सकता. यह बहुत ही डरावनी भूत की कहानी है इसलिए कमज़ोर दिल वाले इस कहानी को रात के समय अकेले ना पढ़ें! इस भूतिया कहानी (Horror Story) को हमने 2 भागों में विभाजित किया है. आइए शुरू करते हैं, जंगल की हवेली चार दोस्तों की डरावनी कहानीभूत की कहानी हिंदी मेंHorror Ghost Story of Four Friends Part 1 – Horror Stories in Hindi

भगवान और भूतों के अस्तित्व का जिन लोगों को विश्वास है, उन्हें पता है की दुनिया में कुछ ऐसी जगह भी होती हैं जहाँ पर जाने के बाद आप दुनिया से परे चले जाते हैं। ऐसी जगहों में लोग दुनिया से परे दूसरी दुनिया यानी ऐसी सर्व शक्तिमान दुनिया में चले जाते हैं, जहाँ पर कोई नियम क़ानून लागू नही होता है। ऐसी ही एक कहानी मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में सामने आई।

Horror Stories in Hindi - Jungle Ki Heveli aur Four Friends Part 1
Horror Stories in Hindi – Jungle Ki Heveli aur Four Friends Part 1

राहुल बजाज, दीपक चौहान, अभिषेक अवस्थी और रियांश सोनी इंदौर के ये चार दोस्त अमेरिका में रह कर पढ़ाई कर रहे थे। पढ़ाई ख़त्म होने के बाद उन चारों की जॉब यूएसए में ही मल्टी नैशनल कम्पनीज़ में लग चुके थी। राहुल बहुत बड़ा वैज्ञानिक बन चुका था।

कई सालों बाद जब इन चारों दोस्तों की मुलाक़ात दीपक की शादी के मौक़े पर होती है, तो चारों बहुत मौज-मस्ती करते हैं। दीपक की शादी के बाद वो चारों भारत में टूर की प्लानिंग करते हैं। दीपक की शादी के कुछ दिन बाद वो सब इंदौर आने की प्लानिंग करने लगे। इसके लिए उन सभी ने टिकट लिया और अपना सामान कलेक्ट करने लगे।

समय बीतता गया और वो दिन आ ही गया जब वो चारों दोस्त इंदौर के लिए अमेरिका से निकल पड़े। इसके लिए उन्हें कैलीफ़ोर्निया से दिल्ली के लिए Air India की Flight में ट्रैवल करना था। चारों हँसी ख़ुशी आख़िरकार दिल्ली पहुँचे। उसके बाद उन्होंने दिल्ली से इंदौर के लिए फ़्लाइट ली और उसी दिन इंदौर पहुँच गए।

इंदौर आने के बाद चारों 2-3 दिन अपने-अपने घर में रुके। उसके बाद सभी टूर पर जाने की प्लानिंग करने लगे। प्लानिंग करते समय चारों को समझ नही आ रहा था कि ऐसी कौन सी जगह घूमने जाएँ जहाँ कुछ नया हो और टूर का मज़ा भी आए।

कुछ समय बाद दीपक ने बताया की उसके पुस्तैनी गाँव प्रतापगढ़ में घूमने लायक़ बढ़िया जगह है, वहाँ पास ही धारकुंडी का जंगल और जंगल सफ़ारी के साथ अंग्रेज़ों के ज़माने की एक बहुत पुरानी और बहुत बड़ी हवेली भी है इसके साथ ही स्थानीय मार्केट और कई मंदिर भी हैं। हम लोग वहाँ जा सकते हैं। लेकिन एक दिक्कत है। उस जंगल की पुरानी हवेली में जाने पर पाबंदी लगी है। हम लोग सिर्फ़ धारकुंडी और इसके आस पास ही घूम सकते हैं।

दीपक की बात ख़त्म होती इससे पहले ही राहुल अचंभित होते हुए बीच में बोला – मतलब….मतलब क्या दिक्कत है?
रियांश – हाँ, भाई बताओ भी क्या दिक्कत है? उसके अंदर जाने पर पाबंदी क्यों लगी है?
राहुल – तुम सब, बोलने दोगे तब ना बताऊँ, अभी से इतना Excited हो रहे हो। वहाँ जाने के बाद तो तुम लोगों होश ही ग़ायब हो जाएँगे।
अभिषेक – अब बताओ भी, क्या वजह है?

राहुल – वो जगह मेरे पुस्तैनी गाँव प्रतापगढ़ से सिर्फ़ 5 किलोमीटर की दूरी पर है। पर यार, वहाँ के लोगों में उस जगह का इतना डर है कि अब कोई नही जाता। मैं भी अपनी ज़िंदगी के शुरुआती 15 साल गाँव में बिताए लेकिन वहाँ आज तक नही गया।

मैंने बड़ों से सुना है कि – जंगल की उस हवेली में जो भी जाता है, वो ज़िंदा वापस नही आता है। कई लोगों तो कभी वापस ही नही आए और जो वापस आये, वो वहाँ से आने के बाद बिल्कुल अलग इंसान बन गए।

अलग इंसान…🤔 मतलब…? – रियांश ने पूछा।
राहुल – कहते हैं, जो लोग वहाँ से वापस आ पाते हैं वो पागलों जैसी हरकतें करने लगते हैं, उनकी याददास्त ख़त्म हो चुकी होती है और वो जल्दी ही मर जाते हैं। जो लोग वापस आए उनको देखने से लगता था, जैसे उनके अंदर किसी भूत-प्रेत का साया हो।
दीपक – अरे यार, तुम भी ना, आज के ज़माने में भी ऐसे अंधविश्वासों को मानते हो। आज विज्ञान इतनी तरक़्क़ी कर चुका है और तुम हो की वही अनपढ़ो जैसे पुरानी अफ़वाहों के साथ जी रहे हो।

अभिषेक – ठीक है, फिर हम लोग वहीं चलें। रियांश तुम भी कुछ बोलो।
रियांश – मैं क्या बोलूँ ? राहुल अभी से डराने में लगा है। अगर सबका डिसिज़न है, तो वहीं चलते हैं।
सभी ने अपनी हाँ कहीं और उसके बाद चारों दोस्त राहुल के गाँव के लिए चल पड़ते हैं। गाँव आने के बाद चारों दोस्त राहुल के घर पर ही रुके थे। अगले दिन चारों दोस्त धारकुंडी घूमने के लिए निकल जाते हैं। धारकुंडी और उसके आस पास घूमते हुए उनको रात हो जाती है, और वो लोग जंगल की हवेली नही देख पाते और वापस राहुल के घर पर आ जाते हैं।

अगले दिन चारों दोस्त हवेली देखने के लिए जैसे ही घर से चलते हैं, तो राहुल के पापा पूछ लेते हैं – आज कहाँ घूमने का प्लान है?
राहुल – पापा! ये सब जंगल की हवेली देखना चाहते हैं, तो आज इनको वहाँ घुमा देता हूँ।
राहुल के पिता जी – क्या….? मतलब तुम सब उस हवेली में जाने वाले हो?
दीपक – जी! अंकल…सोचा तो यही है, लेकिन आप टेन्शन मत लो हम जल्दी वापस आ जाएँगे।
राहुल के पिता जी – बिल्कुल भी नही, तुम लोग हवेली नही जाओगे। वो एरिया सेफ नही है। वहाँ कोई नही जाता।
अभिषेक – अंकल, हम लोग बस हवेली को बाहर से देख कर वापस आ जाएँगे।
राहुल के पिता जी – ठीक है, फिर जल्दी वापस आ जाना। और हाँ कोई भी दिक्कत हो, तो तुरंत फ़ोन करना।
अभिषेक – जी, जी अंकल।

अब चारों दोस्त उस जंगल की हवेली को देखने के लिए निकल पड़ते हैं। जैसे ही वो उस जंगल के पास पहुँचते हैं, वहाँ का नज़ारा देख कर अचंभित हो जाते हैं। वो बिल्कुल हरा-भरा जंगल देखने में बहुत खूबसूरत लग रहा है। कई रंगों के फूल पेड़ों पर दिखाई दे रहे थे। और चिड़ियों के चहचहाहट की आवाज़ भी आ रही थी।

ये सब देख कर रियांश बोला – राहुल, तुम तो बोल रहे थे भूतिया जंगल है यहाँ कोई नही आता। ये तो बहुत ही खूबसूरत लग रहा है। ये भूत वाला डरावना जंगल कैसे हो सकता है।
राहुल – थोड़ा रुको यार, थोड़ा आगे देखना।

जैसे ही चारों कार से आगे बढ़ते हैं, सामने ही दीपक को एक साइन बोर्ड रोड पर लगा हुआ दिख जाता है – जिस पर लिखा होता है। “Restricted Area, यहाँ कोई नही आता, वापस लौट जाओ”।
साइन बोर्ड देखने के बाद – दीपक अचंभित होते हुए बोला। इधर देखो यार। उसमें क्या लिखा है?

सभी दोस्त जब साइन बोर्ड देखते हैं, तो उसको पढ़ने के बाद राहुल आगे जाने से मना कर देता है।
अभिषेक – आगे चले क्या? देख कर आते हैं क्या है?
दीपक – हाँ यार चलो आगे चलते हैं, देख़ते हैं इन लोगों ने किस बात का इतना हउआ बना रखा है।
रियांश – अरे, राहुल वो हवेली कहाँ है? जिसके बारे में बता रहे थे।

राहुल – उस साइन बोर्ड के आगे 10 क़दम की दूरी पर हवेली का रास्ता है। लेकिन मैं इससे आगे नही जाने वाला हूँ।
दीपक – कितना डरता है, चल ना देखते हैं क्या है?
राहुल – नही भाई, मेरे को नही जाना।
अभिषेक – ठीक है, तुम यहीं रुकों। हम जल्दी से वापस आ जाएँगे।

तीनों दोस्त – दीपक, अभिषेक और रियांश कार से उतर कर आगे बढ़ जाते हैं।
जैसे ही हवेली के रास्ते पर तीनों पहुँचते हैं, सामने एक और साइन बोर्ड दिखाई देता है। जिसमें लिखा होता है – “यहाँ से आगे जाना मना है, तुरंत वापस जाओ”।
साइन बोर्ड को पढ़ कर और सामने हवेली का नज़ारा देख कर रियांश आगे जाने से मना कर देता है।
रियांश – भाई, चलो वापस चलते हैं। यहाँ कुछ गड़बड़ लग रही है।

अभिषेक – तुम्हें डर लग रहा है, तो लौट जाओ। हम दोनों अभी हवेली घूम कर आते हैं।
इतना कह अभिषेक और दीपक उस जंगल की हवेली के जंग लगे गेट को खोल कर अंदर चले जाते हैं और रियांश वापस दीपक के पास कार में लौट जाता है।

इतना कह अभिषेक और दीपक उस जंगल की हवेली के जंग लगे गेट को खोल कर अंदर चले जाते हैं और रियांश वापस राहुल के पास कार में लौट जाता है। हवेली के अंदर जाने का रास्ता देखने में डरावना तो था, चारों तरफ़ अजीब से पेड़ और झाड़ियाँ भी थी।

वो पेड़ और झाड़ियाँ ऐसी लग रही थी, मानों किसी भूतिया जंगल की हों। उनके तने जले हुए दिखाई दे रहे थे, पत्तियाँ सुख चुकी थी और वो एक दूसरे से ऐसे गुथे हुए थे मानों रस्सी गुथी हो। इनसे अजीब से महक भी आ रही थी, जैसे कुछ केमिकल जल रहा हो। ऐसे जंगल ना तो दीपक ने कभी देखा था और ना ही अभिषेक ने।

हवेली के अंदर जाने के लिए सिर्फ़ यही रास्ता ही था, जो इतना घना था कि बस वो दोनों ही चल सकते थे और बहुत ही डरावना लग रहा था। वो दोनो गेट के अंदर लगभग 100 मीटर ही दूर गए की अभिषेक ने कहा चल ना यार लौट चलते हैं, बहुत डरावना है ये तो।

कुछ क़दम आगे बढ़े ही थे की अभिषेक ने दीपक का हाथ पकड़ कर धीमी आवाज़ में बोला – भाई, तुम्हें मेरे बग़ल में कुछ दिख रहा है क्या 😭?
दीपक ने जैसे ही उस ओर मुड़ के देखा – वो डर से कापने लगा 😱, वो दोनों डर के मारे चिल्लाने लगे 😭।
उनके सामने पत्तों का ढेर लगा था और उन पत्तों के बीच से कोई डरावना काला इंसान झाँक रहा था। उसकी सिर्फ़ आँखें दिखाई दे रही थी, जो बिल्कुल लाल थी।

दोनों से डर के मारे अपनी आँखें बंद कर ली और चिल्लाने लगे । कुछ देर में जब वो आँखें खोल कर देखते हैं, तो एक डरावना काला इंसान जो किसी भूत की तरह लग रहा था, एक पेड़ से उलटा लकता हुआ दिखा। उसका सिर और एक पैर कटा हुआ था और वो अपने सिर को एक हाथ से पकड़े हुए था जबकि उसका कटा पैर उसके पेट से चिपका हुआ था। और वह कटा हुआ सिर कुछ बड़बड़ा रहा था, उसके चेहरे पर भी उदासी साफ़ दिखाई दे रही थी।

अब दोनों को समझ आ चुका था, कि यहाँ कुछ ठीक नही है। अब दोनों ने वापस लौटने का निर्णय लिया। लेकिन जैसे ही वो वापस आने के लिए पलट कर पीछे मुड़ते हैं उनके सामने से वो रास्ता ही ग़ायब हो चुका था, जिससे वो आए थे। अब उनके चारों तरफ़ सिर्फ़ डरावना जंगल ही था, रास्ता ग़ायब हो चुका था।

वो दोनों वहीं इधर-उधर भटकने लगे और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगे। लेकिन उनके चिल्लाने की आवाज़ उसी जंगल में दब कर रह जाती। अब दोनों को चीख़ने-चिल्लाने की आजीब सी डरावनी आवाज़ें सुनाई देने लगी थी, जिन्हें सुन कर वो दोनों पागल होते जा रहे थे।

उन दोनों को कभी कोई पेड़ पर उलटा लटका दिखता, कभी ज़िंदा जलता हुआ कोई इंसान दिखता, कभी दोनों पैर कटा हुआ कोई इंसान, तो कभी उनके ख़ुद के शरीर पर बहुत से कीड़े-मकोड़े दिखते जो उन्हें खा रहे थे। कई घंटों तक तक वो दोनों चीख़ते-चिल्लाते इधर-उधर भागते रहे, लेकिन ना तो उन्हें रास्ता मिला और ना ही उनकी आवाज़ किसी तक पहुँची।

कुछ देर बाद वो दोनों हवेली के अंदर पहुँच गए। वहाँ हवेली का नज़ारा देख कर दोनों के होश ठिकाने नही रहे, ऐसा लग रहा था जैसे उस हवेली में कई सालों पहले कोई फ़ैक्टरी रही हो। फ़ैक्टरी का सारा सामान वहीं पड़ा था, बड़ी-बड़ी मशीने भी वहाँ थी। लेकिन फ़ैक्टरी के अंदर भी कई नर कंकाल देख कर दोनों थर-थर कापने लगे। कुछ देर बाद वो दोनों एक हवेली की दूसरी मंज़िल में पहुँच जाते हैं, तो उन्हें फिर से आजीब सी डरावनी आवाज़ें सुनाई देने लगती है। उन्हें फिर से अजीब सी चीज़ें दिखने लगती हैं। अब धीरे-धीरे दोनों पागल होते जा रहे थे। और अब वो दोनों एक दूसरे को भी नही पहचान पा रहे थे। वो अजीब सी हरकतें करने लगे।

कई घंटे कार में वही इंतेज़ार करने के बाद राहुल और रियांश सोच में पड़ गए, उनके मन में बुरे ख़्याल आने लगे। वो दोनों सोचने लगे की दीपक और अभिषेक के साथ कुछ बुरा तो नही हुआ होगा। काफ़ी देर हो जाने के बाद जब वो दोनों उस हवेली से बाहर नही आए, तो आख़िरकार राहुल ने अपने पापा को फोन लगा ही लिया और अब कुछ उनको बताया।

लगभग 30 मिनट में राहुल के पिता जी गाँव के कुछ लोगों को लेकर वहाँ पहुँच गए। तब तक अभिषेक और दीपक हवेली से बाहर आ चुके थे और उसी हवेली के गेट के सामने दोनों को देख कर सभी लोग दंग रह गए। दोनों ख़ून से लथपथ थे। दीपक अपने दोनों हाथों से हवेली के गेट की दीवार खुरच रहा था और जोर-ज़ोर से चिल्ला रहा था – मुझे यहीं दफ़नाया गया है, मेरी लाश यहीं है। मुझे अपनी लाश निकालनी है। दूसरी तरफ़ अभिषेक ज़ोर-ज़ोर चिल्ला रहा था – मेरे दोनों हाथ कट चुके हैं, मेरे पैर भी कट चुके हैं। कोई मेरी मदद करो।

अभिषेक और दीपक की ऐसी कंडिशन देखर सभी लोग डर के मारे कापने लगे। तभी राहुल के पिता जी राहुल और रियांश को डाँटते हुए कहा – वहाँ कोई जाता, सामने साइन बोर्ड भी लगा है, तो तुम लोगों को ये बात समझ में नही आती क्या? अब ख़ुद देख लो दोनों का हाल, अब कैसे बचेंगे ये दोनों?

गाँव वालों ने कोशिश करके दोनों को गाड़ी में बैठाया और गाँव ले जाकर एक मंदिर में ले गए वहाँ आस-पास के सभी झाड़-फूँक करने वालों को बुला लिया। लेकिन 3-4 घंटे बाद भी जब उन दोनों की हालत में कोई सुधार नही आया, तो राहुल और रियांश ने दोनों को इंदौर के एक बड़े हॉस्पिटल में भर्ती कराया।

इंदौर के हॉस्पिटल में भर्ती हुए अभिषेक और दीपक को आज 4 महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनकी हालत जस की तस बनी हुई है। आज तक ना तो कोई डॉक्टर कुछ बता पाया और ना ही वो दोनों कुछ बताने की हालत में हैं। दीपक की हालत आज भी पहले जैसी ही है, उसको हॉस्पिटल में बाँध कर रखा जाता है। फिर भी वो अपने हाथ से दीवार खुरचने लगता है। और चिल्लाता रहता है – मेरी लाश यहीं है, मुझे अपनी लाश निकालनी होगी। दूसरी तरफ़ अभिषेक का शरीर पूरी तरह ठीक होने के बाद भी वो चिल्लाता रहता है – मेरे दोनों हाथ कट चुके हैं, मेरे पैर भी कट चुके हैं। कोई मेरी मदद करो। वो ना तो अपने से कुछ कर पाता है और दोनों पैर ठीक होने के बाद भी चल नही पाता।

चार महीने बीतने के बाद भी जब दोनों की हालत में कोई सुधार नही आया, तो आख़िरकार राहुल ने रियांश की बात मान ली और अपने साथ काम करने वाले बड़े वैज्ञानिकों को सब कुछ बताया और उन्हें इंदौर बुला लिया।

इसके आगे की कहानी में क्या होता है? क्या राहुल के बुलाए गए वैज्ञानिक जंगल की इस अबूझ डरावनी हवेली के राज से पर्दा उठा पाते हैं? या फिर वो भी उसी हवेली के शिकार बन जाते हैं? क्या वो दीपक और अभिषेक को सही कर पाएँगे? जानिए इसके आगे की कहानी कल अगले भाग “जंगल की हवेली चार दोस्तों की डरावनी कहानी पार्ट 2Horror Story of Four Friends Part 2” में। तब तक के लिए मैं शिवानी मिश्रा इस कहानी की लेखिका आपको हमारी दूसरी कहानियाँ पढ़ने की सलाह दूँगी।

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Web Title : Horror Ghost Story of Four Friends Part 1Horror Stories in Hindi ॰ जंगल की हवेली चार दोस्तों की डरावनी कहानी पार्ट 1 – भूत की कहानी हिंदी में

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