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दिल्ली के लिफाफा गैंग की हैरान कर देने वाली कहानी (Kahani), गजब थे लूट के तरीक़े – सत्य घटना पर आधारित हिंदी कहानी (Hindi Kahani)

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दोस्तों, आज की हिंदी कहानी (Hindi Kahani) एक स्पेशल कहानी है। यह हिंदी कहानी (Hindi Kahani) दिल्ली में हुई सत्य घटना पर आधारित है। जिसका पर्दाफ़ाश दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाल ही में किया है।




आज की इस कहानी में हम आपको दिल्ली के एक गैंग के बारे में बताएँगे। इस गैंग के कारनामे सुनकर आप हैरान रह जाएँगे। दिल्ली के लिफाफा गैंग ने लूट का ऐसा तरीक़ा बनाया था, जिससे अपना सब कुछ लुट जाने के बाद भी लुटने वाले इंसान को काफ़ी देर से लूट का एहसास होता था। इस हिंदी कहानी (Hindi Kahani) में हम आपको इस गैंग के बारे में बताएँगे साथ ही इसके कारनामों के बारे में भी बताएँगे। लिफाफा गैंग की यह पूरी कहानी (Kahani) किसी फिल्म की कहानी (Kahani) से कम नही है 

Kahani, lifafa gang Delhi Crime
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आइए शुरू करते हैं दिल्ली के लिफाफा गैंग की पूरी जन्म कुंडली और उसके कारनामों को बताती यह हिंदी कहानी (Hindi Kahani)।

दिल्ली के लिफाफा गैंग की हिंदी कहानी (Hindi Kahani)

आप जानते ही होंगे की ठगों और लुटेरों की एक अलग दुनिया ही होती है। अगर आप ठगों और लुटेरों इस काली दुनिया के बारे में जितना जानने की कोशिश करेंगे, उतना ही कम होगा। साथ ही आप इनके कारनामे जानकर हैरान रह जाएँगे। इस हिंदी कहानी (Hindi Kahani) के माध्यम से आपको हम दिल्ली के एक लुटेरे गैंग लिफाफा गैंग की कहानी (Kahani) बताएँगे।


दिल्ली में एक ऐसा गैंग सक्रिय था, जिसने लुटने का एक ऐसा मॉडल बनाया जिसे जानकर दिल्ली पुलिस भी हैरान रह गई। इस गैंग का नाम था – लिफाफा गैंग। लुटने के अपने स्पेशल तरीक़े की वजह से यह गैंग जिसको लूटता था, उस व्यक्ति को एहसास भी तब होता था, जब उसका सब कुछ लुट चुका होता था।




टैक्सी में बैठे हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के वायरलेस सेट पुलिस कंट्रोल रूम की गूंजती  आवाज, उनके चेहरों पर लगा हुआ दिल्ली पुलिस का मास्क, और फिर आधे रास्ते पर होता है लिफ़ाफ़े का ड्रामा। ये है दिल्ली के इस लिफ़ाफ़े गैंग का लूटने का ट्रेड मार्क स्टाइल, हो गए ना आप भी हैरान लिफाफा गैंग की इस कहानी को पढ़ कर।


दिल्ली पुलिस को कुछ समय से इस लिफाफा गैंग की लूट वारदातों की शिकायतें मिल रही थी। इन शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने एक स्पेशल यूनिट को लिफाफा गैंग को धर दबोचने और पर्दाफ़ाश करने का काम सौंपा।


दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट ने काफ़ी कोशिशों के बाद जाल बिछा कर इस लिफाफा गैंग को धर दबोचने में कामयाब हो गयी। इसके बाद इनकी करतूतों को जानकर दिल्ली पुलिस के आला-अधिकारी भी दंग रह गए।


लिफाफा गैंग ने 16 नवंबर को दिल्ली के आरके पुरम के रहने वाले राजेंद्र को अपना शिकार बनाया। उस समय राजेंद्र आरके पुरम से वसंतकुंज जाने के लिए अपने घर से बाहर निकल कर, किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इंतेज़ार कर रहे थे। तभी एक टैक्सी उनके पास आकार रुकी और बैठने का इशारा की।


राजेंद्र ने टैक्सी में पुलिस का मास्क पहने 2 लोगों को देखा तो, उन्हें संतोष हुआ और वो टैक्सी से ही अपने गंतव्य तक जाने का फैसला किया। लेकिन असली कहानी [Kahani] की शुरुआत अब होती है। दिल थाम कर पढ़िए चोरों की इस फ़िल्मी स्टाइल लूट की कहानी (Kahani) में आगे क्या होता है।



लिफाफा गैंग राजेंद्र जैसे लोगों की तलाश में इधर उधर घूमती थी, जहाँ उनको अपना शिकार दिखाई दिया, वही ये लोग जाल बिछा कर अपनी टैक्सी में बैठा लेते थे।


जब राजेंद्र उस टैक्सी में बैठ जाता है, तो कुछ दूर जाने के बाद टैक्सी में बैठे दिल्ली पुलिस का मास्क लगाए लोगों के वायरलेस सेट पर दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम की आवाज़ गूंजने लगती है, इससे राजेंद्र को यक़ींन हो जाता है की यह असली पुलिस वाले हैं।


अभी टैक्सी कुछ दी दूर गई थी की टैक्सी के ड्राइवर ने अपने मोबाइल में किसी से बात की और बात करने के बाद उस ड्राइवर ने टैक्सी में बैठे 2 ठगों (जो की पुलिस का मास्क लगाए थे) को आगे रोड में कोई चेकिंग होने की बात बताई।


यह बात सुन कर कार में बैठा हुआ राजेंद्र थोड़ा घबरा जाता है। लेकिन दोनों ठगों ने राजेंद्र को समझाया की अगर वो चेकिंग से बचना चाहता है, तो अपना क़ीमती सामान जैसे की – मोबाइल, एटीएम कार्ड, पर्स इत्यादि को इस लिफ़ाफ़े में (लिफाफा राजेंद्र की तरफ़ आगे बढ़ाते हुए) डाल कर उन्हें दे दें। चेकिंग क्रॉस करने के बाद आप इस लिफ़ाफ़े को ले लेना।


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राजेंद्र यह सोच कर उन्हें अपना क़ीमती सामान लिफ़ाफ़े में डाल कर दे देता है, की वो पुलिसवाले हैं। कुछ देर में राजेंद्र का गंतव्य स्थल वसंतकुंज आने वाला होता है, तो राजेंद्र उतरने की तैयारी करता है।


राजेंद्र जब उतरता है, तो पुलिस वाले (दोनों ठग) वो लिफाफा उसे थमा देते है। और फिर गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ जाती है। लेकिन टैक्सी से उतर कर राजेंद्र जब वो लिफाफा चेक करता है, तो उसके होश उड़ जाते हैं। क्योंकि लिफ़ाफ़े से उसका क़ीमती सामान ग़ायब था और उसकी जगह कुछ रद्दी और कचरा भरा हुआ था। यह सब देख कर राजेंद्र सिर पीटता रह जाता है और उसे असली खेल का अंदाज़ा लगता है।


जब तक राजेंद्र को अंदाज़ा हुआ की उसके साथ लूट की वरदात को अंजाम दिया गया है, बहुत देर हो चुकी होती है। राजेंद्र चीख़ता-चिल्लाता टैक्सी के पीछे भागता है, लेकिन उसकी सारी कोशिशें बेकार हो जाती हैं।


अब आपको लिफ़ाफ़े की कहानी बताते हैं – असल में दोनों ठग जिस तरह के लिफाफे में अपने शिकार का सामान डलवाते थे, उसी तरह का दूसरा लिफाफा तैयार करके रखते थे। क़ीमती सामान लेने के बाद वो उस लिफ़ाफ़े की अदला-बदली कर देते थे। यही इस गैंग के ठग का स्टाइल था।


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दिल्ली पुलिस को जब इस लिफ़ाफ़े गैंग की कई शिकायतें मिली तो वह इसका ख़ुलासा करने के लिए कई टीमों का गठन कर दिया। दिल्ली पुलिस की इन टीमों ने जाल बिछा कर लिफाफा ठग गैंग की पूरी कहानी का पर्दाफ़ाश करने में कामयाब हो पायी।


इस ठग के लोगों ने लोगों को अपना शिकार बना कर लूट की वारदात को अंजाम देने के लिए दिल्ली पुलिस का मास्क तैयार करवाया था और एक नक़ली वॉकी टॉकी बनवा कर उसमें पुलिस कंट्रोल रूम की आवाज़ रिकॉर्ड की हुई थी। जब कोई शिकार उनके जाल में फँस कर टैक्सी में बैठता था, तो कुछ देर बाद वो नक़ली वॉकी टॉकी में रिकॉर्ड की हुई आवाज़ को बजाना शुरू कर देते थे, इससे उस व्यक्ति को इनके असली पुलिस होने का यक़ींन हो जाता था।

इस गैंग को पकड़ने के बाद दिल्ली पुलिस को इनके पास से कई गाड़ियाँ, कई लाख रुपए कैश, और लूट के कई ATM कार्ड मिले थे। इसके बाद पुलिस ने खुलासा किया कि वे लोग जो सोना लूटते थे, उस पूरे सोने को सभी आपस में बाँट कर मुत्थुट फाइनेंस कम्पनी में अपनी पत्नी के नाम से खोले गए खाते में जमा करवा देते थे।


दिल्ली के लिफाफा गैंग की होश उड़ा देने वाली लूट की इस कहानी को पढ़ कर आपको कैसा लगा। अगर आप दिल्ली जाएँ या किसी भी शहर में हो, वहाँ अब ऐसे नक़ली पुलिस वालों से सावधान रहें और चाहे कुछ भी हो जाए कोई भी असली पुलिस आपका क़ीमती सामान नही लेती है। इसलिए किसी को भी अपना क़ीमती सामान किसी भी क़ीमत पर ना दें। अगर ऐसा कोई आपको मिले जो कोई भी बहाना बनाकर या कोई भी कहानी सुनाकर (जिसे सुन कर या देख कर आपको सब कुछ असली लगे) आपसे क़ीमती सामान माँगता है, तो आप तुरंत एक काम करें। कोई बहाना बनाकर उनकी फ़ोटो खीचें या Video बनाएँ और शोर करके आस पास के लोगों को बुला लें। क्योंकि इनके पास हथियार भी हो सकता है, तो आप अकेले इनसे ना उलझे बल्कि दिमाग़ से काम लें।


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अगर ऐसी कहानी (Kahani) आपके साथ हो तो आपको क्या करना चाहिए?

  • सबसे पहले आप चोरी छुपे उनकी फ़ोटो खींच लें या Video Record कर लें।
  • शोर कर लोगों को बुला कर पूरी कहानी बताएँ और उन लुटेरों को पकड़ लें।
  • अब आप पुलिस को Emergency कॉल लगाएँ और तुरंत घटना स्थल पर बुलाएँ।
  • जब तक पुलिस ना आ जाए लुटेरों को पकड़ कर या बाँध कर रखें।

दोस्तों आपको यह कहानी (Kahani) कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें जरूर बताएँ। अगर आपको लिफाफा गैंग कि यह असली कहानी (kahani) पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ Facebook, Whatsapp में share करें और Status में लगाएँ। ताकि सभी को जागरूक किया जा सके और इन जैसे लुटेरों से सबको बचाया जा सके। ताकि इनको सज़ा दिलवा कर राजेंद्र जैसी कोई कहानी (Kahani) दोहराई ना जाए।


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