Greedy Story

किसान के दो जुड़वां बेटे सोनू और लालची मोनू की कहानी

किसान के दो जुड़वां बेटे सोनू और लालची मोनू के लालच की कहानी – (Kisan Ke Do Bete, Lalach Buri Bala hai Kahani) : बहुत समय पहले एक गाँव में किसान के दो जुड़वाँ बेटे थे, जिनका नाम सोनू और मोनू था। वे इतने समान थे कि उनके शुरुआती दिनों में उनकी मां के लिए उन दोनों को एक दूसरे से अलग पहचान पाना मुश्किल हो गया था। हालांकि, वे अपने व्यवहार में एक-दूसरे से बहुत अलग थे। सोनू का कोई दोस्त नहीं था, जबकि मोनू के बहुत से दोस्त थे और वो एक मिलनशील व्यक्ति था।

सोनू को मिठाई पसंद थी, लेकिन मोनू को मसालेदार खाना पसंद था और वह मिठाइयों से नफरत करता था। सोनू मम्मी का लाड़ला था और मोनू डैडी का लाड़ला। सोनू एक उदार और निस्वार्थ व्यक्ति था जबकि मोनू लालची और स्वार्थी था।

Kisan Ke Do Bete Lalach Buri Bala hai Kahani
Kisan Ke Do Bete Lalach Buri Bala hai Kahani

जैसे-जैसे सोनू और मोनू बड़े हुए, उनके पिता अपनी धन-दौलत को उनके बीच समान रूप से साझा करना चाहते थे। हालाँकि, मोनू सहमत नहीं था और उसने तर्क दिया कि हम दोनों में से जो अधिक बुद्धिमान हो उसे धन का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होना चाहिए।

सोनू सहमत हो गया। तब उनके पिता ने दोनों की बुद्धिमानी पता करने के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करने का फैसला किया। उसने दोनों बेटों से कहा कि वे जितना हो सके पैदल चलें और सूर्यास्त से पहले घर लौट आएं। धन को तय की गई दूरी के अनुपात में विभाजित किया जाएगा। प्रतियोगिता के नियम के रूप में, उन्हें समय का ध्यान रखने के लिए घड़ी ले जाने की अनुमति नहीं थी।

मोनू ने सोचा बढ़िया मौक़ा है, आज वो ज़्यादा चलेगा और फिर जल्दी से शाम को घर आ जाएगा तो उसको पिता जी की संपत्ति में ज़्यादा हिस्सा मिलेगा। ये सोच कर वह घर से दौड़ लगाना शुरू कर दिया और तब तक दौड़ता रहा जब तक कि थक नही जाता था। वहीं दूसरी तरफ़ सोनू पिता जी की बात सुन कर सोचा पैदल चलना है तो क्यों ना कोई काम कर लिया जाए।

फिर सोनू ने सोचा एक खेत में अभी बुआई नही हुई है और हल जोतने के लिए भी बचा है। इसलिए उसने हल लिया और बैलों के लेकर अपने खेत में जुताई करने लगा। दोपहर को सोनू बैलों को आराम करने के लिए छोड़ दिया और खुद भी आराम किया उसके बाद उसने फिर जुताई शुरू कर दी। इस तरह वो शाम तक पूरा खेत जोत कर बोने के लिए तैयार कर दिया। उसके बाद वो अपने बैल और हल लेकर घर का तरफ़ निकल गया।

वहीं दूसरी तरफ़ मोनू लगातार दौड़ता रहता। शाम होने वाली थी मोनू घर से काफ़ी दूर निकल गया था, उसे आने में रात हो जाती। तभी उसे एक बरगद का पेड़ दिखाई दिया। उसने सोचा थोड़ा आराम कर लेता हूँ फिर दौड़ते हुए घर पहुँच जाऊँगा। वो बरगद के पेड़ के नीचे आराम करने के लिए बैठा था तभी थके होने की वजह से उसे नींद आ गई।

अब घर में पिता उन दोनों इंतेज़ार कर रहे थे। तभी सोनू आ गया लेकिन मोनू का कुछ पता नही चला। काफ़ी रात हो रही थी, वो घर नही पहुँचा सबको उसकी फ़िक्र होने लगी थी। फिर लगभग आधी रात को बहुत ज़्यादा थका हुआ मोनू घर पहुँचा और पानी पीकर बेहोश की तरह सो गया।

सुबह जब पिता ने अपने दोनों बेटों को बुलाकर कल के बारे में पूछा तो मोनू ने कहा – वो पूरा दिन दौड़ता हुआ ज़्यादा दूर तक गया था इसलिए उसे संपत्ति में ज़्यादा हिस्सा मिलना चाहिए। लेकिन सोनू चुप था। तभी पिता ने उससे पूछा तुमने क्या किया था कल – तो सोनू ने जवाब दिया पिता जी वो जो अपना खेत बुआई के लिए रह गया था कल मैं उसी को जोत रहा था ताकि समय से बुआई हो सके। मैंने पूरा खेत जोत दिया है, अब कल हम उसमें बुआई कर सकते हैं।

ये बात सुन कर मोनू ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगा। तभी उसके पिता ने समझाया की मोनू बेटा – देखो कल मैंने तुम दोनों को पैदल चलने के लिए कहा था। तुम तो पूरा दिन बिना मतलब का दौड़ते रहे जबकि सोनू ने अपना खेत जोत लिया। अब बताओ कौन ज़्यादा बुद्धिमानी है। तब मोनू को पिता जी की बात समझ में आ जाती है और अब वो भविष्य में सोनू की तरह बनने का फ़ैसला करता है।

Moral of the Story : इस कहानी में बताया गया है कि लोगों को अपने जीवन का सदुपयोग करना चाहिए। लालच के चक्कर में बिना मतलब के काम नही करना चाहिए। क्योंकि लालच से हमें कुछ मिलने वाला नही बल्कि नुक़सान ही होता है, इसीलिए कहा जाता है कि – ‘लालच बुरी बला है (Lalach Buri Bala Hai)’ यानी लालच सभी बुराइयों की जड़ है (Avarice is the Root of all Evils Hindi Stories)।

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