Greedy Story

लालची घसीटा राम मिठाई वाला – Lalachi Ghasita Ram Mithai Wala ॰ Lalach Buri Bala Hai

Lalachi Ghasita Ram Mithai Wala (लालची घसीटा राम मिठाई वाला) : पटपुरिया गाँव में घसीटा राम नाम का एक मिठाई वाला था। वो इतनी स्वादिष्ट मिठाई बनाता था कि उसकी दुकान में भीड़ लगती थी। दूर-दूर से लोग उसकी मिठाई की दुकान में मिठाई ख़रीदने आते थे। घसीटा राम सुबह जितनी भी मिठाई बनाता शाम होते-होते सब ख़त्म हो जाती थी। इससे उसको बहुत फ़ायदा मिलता था। उसके पास धन की कोई कमी नही थी। घर में सिर्फ़ पत्नी और बूढ़े माता-पिता थे उनके ऊपर भी कम ही खर्च होता था। जितना पैसा बचता वो बैंक में जमा करता जाता और सोना ख़रीद कर घर में रखता जाता। इस तरह घसीटा राम और धनवान होता जा रहा था।

फिर एक दिन उसके मन में लालच आया और वो सोचने लगा कि पूरा दिन मिठाई की दुकान में मेहनत करता हूँ फिर भी लाभ कम होता है। क्यों ना कोई उपाय किया जाए ताकि मुनाफ़ा बढ़े। जब उसे कोई दूसरा रास्ता नही दिखाई दिया तो घसीटा राम ने दुकान के तराज़ू के नीचे चुम्बक लगा दिया ताकि कम वजन में उसे ज़्यादा मुनाफ़ा हो सके।

उसको ऐसे करते देख उसकी पत्नी ने कई बार टोका लेकिन वो नही माना और लोगों को कम वजन करके मिठाई देता उससे मुनाफ़ा बढ़ने लगा। दिन बीतते गए एक दिन श्याम नाम एक बूढ़ा उसकी दुकान में मिठाई लेने आया। उसने घसीटा राम से 1 किलो मिठाई ख़रीदी लेकिन जब वो मिठाई का डिब्बा उठाया तो उसे वजन कम लगा, तब बूढ़े ने लालची घसीटा राम से कहा – भाई साहेब! ये मिठाई तो कम लग रही है, शायद तौलने में कोई गलती हुई हो, ज़रा फिर से चेक करना।

तब लालची घसीटा राम ने बूढ़े बाबा से कहा – मेरे पास इतना टाइम नही है, कि सिर्फ़ एक ही ग्राहक के लिए बार-बार काँटा करूँ। अब जाओ मुझे दूसरे ग्राहक को भी मिठाई देनी है। ये सुन कर बूढ़े को उस पर शक हुआ। वो बूढ़ा वहाँ से तो चला गया लेकिन दूसरी दुकान में जाकर उसने मिठाई का वजन कराया तो वो 800 ग्राम ही थी।

Lalachi Ghasita Ram Mithai Wala
Lalachi Ghasita Ram Mithai Wala

फिर बूढ़े ने लालची घसीटा राम मिठाई वाला को सबक़ सिखाने के लिए एक उपाय सोचा। बूढ़े ने एक तराज़ू लिया और लालची घसीटा राम मिठाई वाला की दुकान के सामने ही जब भीड़ होने लगी तो जाकर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाया – ‘आओ, आओ…..जादुई तराज़ू देखो….इसमें जितनी भी मिठाई रखो उसका वजन कम ही होता है’।

जादुई तराज़ू का जादू देखने के लिए घसीटा राम से जो ग्राहक मिठाई लेता वो उस बूढ़े के पास जाकर वजन कराता तो सभी का वजन कम रहता। काफ़ी देर तक ऐसा ही चलता रहा। फिर लालची घसीटा राम को उस पर ग़ुस्सा आया और वो बूढ़े अपने दुकान से दूर भगाने के लिए उसके पास जाकर झगड़ा करने लगा।

लालची घसीटा राम ने बूढ़े से कहा – जादुई तराज़ू जैसी कोई चीज नही होती, तुम झूठ बोल रहे हो।
तब बूढ़े ने घसीटा राम से कहा – हाँ, घसीटा राम तुम ठीक कह रहे हो। जादुई तराज़ू नही होता, लेकिन अब तुम बताओ मिठाई का वजन कम क्यों होता है? इतना सुन कर घसीटा राम बिल्कुल चुप हो गया।

इतने में बूढ़ा उठा और घसीटा राम की मिठाई की दुकान का तराज़ू लाकर भीड़ को दिखाया की ये लालची तराज़ू के नीचे चुम्बक लगता है ताकि कम मिठाई देनी पड़े। इस तरह घसीटा राम की चोरी पकड़ी गई।

अब गुस्साई भीड़ ने लालची घसीटा राम को जम कर कूट दिया और फिर धीरे-धीरे उसकी दुकान से भीड़ ग़ायब होने लगी। आख़िरकार लालची घसीटा राम मिठाई वाला को उसके किए की सजा मिली और वो घाटे में जाने लगा। इसलिए कहते हैं ‘लालच बुरी बला है, इससे बच कर रहना चाहिए’।

Moral of the Story : लालच बुरी बला है (Lalach Buri Bala Hai)।

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