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भारतीय सेना के कमांडो अशोक ने जब अकेले ही पाक सेना को भागने के लिए किया था मजबूर – Motivational Story in Hindi

Indian army commando Ashok Hindi Motivational Story – Inspirational Story in Hindi

स्वागत है दोस्तों, आज हम आपको कारगिल की लड़ाई के नायकों में से एक उत्तरप्रदेश के भारतीय सेना के कमांडो अशोक की शौर्य गाथा Hindi Motivational Story बताने वाले हैं।

तो आइए शुरू करते हैं भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में हुई Kargil war की Hindi Motivational Story.

वैसे तो भारतीय सेना बहादुर सैनिकों से भरी है,  आपने भारतीय सैनिकों की बहादुरी के कई क़िस्से सुनें होंगे। उनमे से कुछ अनछुए क़िस्से कहानियों में से आज हम कारगिल युद्ध 1999 के एक बहादुर सैनिक और कमांडों अशोक की Hindi Motivational Story आपके लिए लाए हैं।

Motivational Story in Hindi

बात उन दिनों की है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध चल रहा था। पाकिस्तान और पाकिस्तान की सेना में वादाखिलाफी, गद्दारी, धोखा देना जैसी ख़ूबियाँ कूट-कूट कर भरी हुई हैं।

इसमें कोई शक नही है की पाकिस्तान और चीन ऐसे देश हैं, जिन पर कभी भी विश्वास नही किया जा सकता।

बात उन दिनों की है जब कारगिल युद्ध में, युद्ध विराम की घोषणा हो चुकी थी। लेकिन उसके बाद भी पाकिस्तान जैसे मक्कार और धोखेबाज देश की सेना ने भारतीय सैनिकों पर हमला किया था।

Motivational Story in Hindi - Army Commando Ashok
Motivational Story in Hindi – Army Commando Ashok

युद्ध विराम की घोषणा के बाद भारतीय सेना ऐसे हमलों की उम्मीद नही कर रही थी। इसके बावजूद भी पाकिस्तान की सेना द्वारा युद्ध विराम की शर्त तोड़ कर किए हमले में भारतीय सेना के कमांडो अशोक और भारतीय सैनिकों ने उनके इस दुस्साहस पूर्ण हमले का मुँहतोड़ जवाब दिया था।

भारतीय सेना के वीर सैनिकों ने पाकिस्तान के 2 सैनिको को मार गिराया। इस अप्रत्यासित जवाबी कार्यवाही की उम्मीद पाकिस्तान की सेना को नही थी। लेकिन जब वो भारतीय सैनिकों के हमले का सामना नहीं कर सके तो उन्हें दम दबाकर वापस भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

अब हम आपको सेना के रिटायर्ड कमांडों अशोक के साथ हुई ‘kahani.hindualert.in‘ की बातचीत और उनकी कहानी ( Hindi Motivational Story ) बताने वाले हैं।

सेना के रिटायर्ड कमांडों अशोक का जन्म उत्तरप्रदेश में नोएडा के गौतमबुद्ध नगर के शाहपुरखुर्द गांव में हुआ था। उनकी शिक्षा भी गाँव में ही पूरी हुई थी। भारतीय सेना में अशोक की भर्ती खेल कोटे से ही थी।

कमांडों अशोक ने बताया कि उन्होंने कुश्ती प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर टॉप पर पहुँच गए थे। इसी के बाद 11 फरवरी 1999 को उन्हें आर्मी की राजपूत रेजिमेंट में स्पोर्ट कोटे से भर्ती किया गया था।

अशोक ने बताया कि पल्लनवाला यूनिट जो की कश्मीर में हैं में उनकी तैनाती 2003 में हुई थी। वहाँ एक सबसे खतरनाक पोस्ट है, जिसे बांध पोस्ट कहा जाता है।

यह पोस्ट खतरनाक इसलिए है कि वहाँ से सिर्फ़ 2-3 किलोमीटर दूर ही पाकिस्तान की सेना की पोस्ट चालू हो जाती हैं। ऐसे में इस इलाक़े में अक्सर फ़ायरिंग होती रहती है। अशोक इस पोस्ट में अपने एक साथी सैनिक के साथ तैनात रहते थे।

1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच 2004 में सीज फायर का समझौता हुआ था। इस समझौते में दोनों पक्ष इस बात पर राज़ी थे की दोनों की सेनाएँ अब एक-दूसरे पर फायरिंग  नही करेंगी और बॉर्डर पर शांति बनाए रखेंगी।

अशोक ने बताया कि भारतीय सेना को लगा की पाकिस्तान की सेना इस समझौते का पालन करेगी। लेकिन नवंबर आते-आते पाकिस्तान का असली चेहरा सामने आ गया था।

नवंबर के एक दिन शाम को 6 बजे के आस-पास धीरे धीरे अंधेरा होने लगा था, और भारतीय सेना के सैनिक आराम कर रहे थे, उसी समय कुछ सैनिक खाना बनाने की तैयारी कर रहे थे।

अशोक ने कहा कि “हमारी पोस्ट से लगभग 100 मीटर दूर एक घना जंगल है, उस पोस्ट पर हमारा एक सैनिक था। तभी उस सैनिक को जंगल में कुछ हलचल दिखी।

उस सैनिक ने इस बात को अपने साथियों को बताया और सबको सचेत किया, हमें लगा कि कोई जानवर होगा। कुछ मिनट बाद ही दुश्मन सैनिकों ने पोस्ट के टॉवर पर तैनात सैनिक पर गोली चलाई लेकिन दुश्मन सैनिकों का निशाना चूक गया।

दुश्मन के गोली चलाते ही, भारतीय सैनिक अपने हथियार लेने के लिए दौड़े, लेकिन पाकिस्तान की सेना लगातार फायरिंग चालू कर दी, इससे हमारा बंकर में जाना भी असंभव हो गया।

फिर हम लोगों ने आस पास की चीज़ों का सहारा और उनका आड़ लेकर दुश्मन को जवाब देने लगे।

हमारी यूनिट ने आर्मी हेड क्वार्टर को इस हमले की सूचना भेज दी, इसके बाद दोनों देश के सैनिक लगभग एक घंटा तक फायरिंग करते रहे।

हमारे साथियों ने साहस दिखाया और हमारी जवाबी गोलीबारी में पाकिस्तान की सेना के 2 सैनिक मारे गए। हमारी जवाबी कार्यवाही में दुश्मन के कई सैनिक घायल भी हो गए थे।

जवाबी हमला करके भारतीय सेना की एक छोटी सी टुकड़ी ने पाकिस्तान की सेना के पैर हिला दिए और डर के मारे दुम दबा कर पीछे हटने को मजबूर हो गए।

कुछ समय बाद ही पास के आर्मी हेड क्वार्टर से काफ़ी संख्या में सेना अपने साजों-समान के साथ आ गयी थी, तब तक पाकिस्तान की सेना दुम दबा कर भाग चुकी थी। इसके बाद हमारे अधिकारियों ने सभी सैनिकों का सम्मान किया और हमारी वीरता की सराहना की।

अशोक ने HinduAlert को बताया कि वह भारतीय सेना की शूटिंग टीम का हिस्सा था। उन्होंने सेना की कई शूटिंग प्रतियोगिताओं में 15 से ज़्यादा पदक जीते थे।

साथ ही उन्हें आर्मी में कमांडों ट्रेनिंग भी मिली थी। साथ ही उन्होंने बताया की 2003 में अफ्रीका महाद्वीप के देश इथोपिया में गृह युद्ध हो रहा था, उस समय वो सयुक्त राष्ट्र संघ की भेजी गई शांति सैनिकों के ग्रूप में साथ गए थे।

दोस्तों, यह Hindi Motivational Story भारतीय सेना के कमांडों अशोक की है, जिन्होंने कारगिल युद्ध के बाद भी कई सालों तक देश की सेवा की थी अब वो आर्मी से रिटायर हो चुके हैं।

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