पंचतंत्र की कहानी मित्रभेद – Panchtantra Ki Kahani – लालची घसीटा राम, उसका घोड़ा तेजा

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Panchtantra Ki Kahani - Mitrabhed Lalchi Ghashita Ram
Panchtantra Ki Kahani - Mitrabhed Lalchi Ghashita Ram

Panchtantra Ki Kahani (पंचतंत्र की कहानी ) : नन्दकवन नाम के गाँव में एक व्यक्ति रहता है, जिसका नाम वणिक था। उसका एक बेटा था जिसका नाम घसीटा राम था। घसीटा राम बहुत मेहनती और लालची इंसान था। घसीटा राम ने व्यापार करके बहुत पैसा कमाया लिया था।

बहुत पैसा कमाने के बाद भी घसीटा राम का लालच कम नही हुआ था। वह और बहुत सारा धन कमाना चाहता था। घसीटा राम चाहे जितना पैसा कमा लेता लेकिन उसे संतोष नही होता था। वह हमेशा और ज़्यादा पैसा कमाने के बारे में सोचता था।

क्या आपको पता है की पैसा कमाने के कौन कौन से तरीक़े हैं। शास्त्रों में धन कमाने के 6 उपाय बताए गए हैं। शास्त्रों के अनुसार खेती, व्यापार, भिक्षा, राजा की सेवा, शिक्षा, सूद का काम करके पैसा कमाया जा सकता है।

लेकिन इन सबमें केवल व्यापार से पैसा कमाना ही सबसे अच्छा माना गया है। पुराने ज़माने में व्यापार में सबसे अच्छा ये माना जाता था कि दूसरे देश से कुछ मूल्यवान वस्तुयें लाकर अपने देश में बेच कर पैसा कमाया जाए।

आगे आपको बताते है की इस पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) में घसीटा राम क्या क्या करता है?

Panchtantra Ki Kahani - Mitrabhed Lalchi Ghashita Ram
Panchtantra Ki Kahani – Mitrabhed Lalchi Ghashita Ram

पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) के अनुसार घसीटा राम ने और अधिक पैसा कमाने के लिए विदेश जाने का प्लान बनाया ताकि वह मूल्यवान वस्तुयें लाकर अपने देश में बेच कर बहुत सारा पैसा कमा सके।

उस समय विदेश केवल समुद्र के रास्ते ही जाया जा सकता था। इसलिए घसीटा राम ने समुद्र के पास जहाँ जहाज़ रुकते थे वहाँ जाना का निर्णय लिया और अपनी घुड़सवारी तैयार करवाई।

उसने एक रथ तैयार करवाया, इस रथ को बहुत सुंदर और तेज़-तर्रार घोड़े हाँकने वाले थे। उन दोनों घोड़ों के नाम तेजा और सुक्रा थे।

घसीटा राम अब समुद्र तक जाने के लिए निकल पड़ा। उसके रथ तेज़ गति से आगे बढ़ता जा रहा था। कई दिन बीतने के बाद उसके रास्ते में एक नदी पड़ी।  उस नदी में पानी के साथ बहुत कीचड़ भी था।

पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) में आगे बताया गया है कि घसीटा राम का रथ जब उस नदी को पार करने के लिए आगे बढ़ा तो उसके रथ को जो दो घोड़े खींच रहे थे, उसमें से एक घोड़ा ‘तेजा’ नदी के दलदल में फँस गया।

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दलदल से निकलने की वह बहुत कोशिश किया लेकिन नाकाम रहा। इसी कोशिश में तेजा का एक पैर टूट गया।

तेजा का पैर टूटने पर घसीटा राम को बहुत दुःख हुआ और वह अब उस घोड़े के बिना आगे नही बढ़ सकता था इसलिए उसने उसके इलाज के लिए इधर उधर घूमता रहा लेकिन उसे कोई नही मिला।

पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) में बताया गया है कि घसीटा राम तीन-चार दिनों तक तेज़ के स्वस्थ होने का इंतेज़ार करता रहा।

फिर घसीटा राम के रथ को चलाने वाले सारथी ने उससे कहा की तेज़ के पूरी तरह ठीक होने और फिर से रथ चलाने लायक़ होने में कई दिन लग जाएँगे, तो इतने दिनों तक यह रुक कर अपने प्राणों को संकट में नही डाल सकते हैं।

इस घोड़े के लिए हम अपने प्राण क्यों गवाएँ? अगर हम यहाँ रुके तो भोजन पानी की कमी और जंगली जानवरों के कारण मृत्यु को प्राप्त कर सकते हैं। हमारा जीवन ख़त्म हो सकता है। इसलिए हमें यहाँ से अब चलना चाहिए।

इतना सुन कर घसीटा राम ने आगे बढ़ने का निर्णय किया और तेज़ की देखभाल के लिए उसने एक आदमी को कह दिया और उसे कुछ रुपए और सोने के सिक्के देकर आगे की ओर बढ़ने का निर्णय किया।

घोड़े की रखवाली करने वाले इंसान को जब पता चला की यह जंगल शेर-चीता जैसे जंगली जानवरों से भरा पड़ा है, तो उसने वहाँ से भाग जाने का निर्णय किया और मौक़ा पाकर भाग लिया।

घसीटा राम से उसने यह कह दिया की तेजा मर चुका है। इसलिए वह उसका अंतिम संस्कार करके वहाँ से चला आया। घसीटा राम तेजा की मृत्यु का समाचार पाकर बहुत दुखी हुआ।

लेकिन उसके पास आगे बढ़ने के अलावा कोई और रास्ता नही था।   पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) आगे और भी रोचक है।

घसीटा राम तेजा की मौत से दुखी था। लेकिन सेवक के चले जाने के बाद जंगल की अच्छी घास, साफ़ हवा, पानी पाकर तेजा जल्द ही ठीक हो गया। आपको पता होगा की नदी के किनारे बहुत अच्छी घास होती है।

तेजा उसी को चरता और नदी का पानी पीकर आराम करता था, इसलिए वह जल्दी ठीक हो गया। साफ़ हवा-पानी, और स्वस्थ वर्धक घास खाकर तेजा और भी बेहतर हृष्ट-पुष्ट हो गया।

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इसके बाद अब वह स्वतंत्र था इसलिए पूरा दिन इधर उधर घूमता, चरता और आराम करता था। ऐसे ही उस घोड़े यानी तेज़ के दिन बीत रहे थे।

(Panchtantra Ki Kahani) पंचतंत्र की इस कहानी में आगे अब क्या होता है पढ़िए। एक दिन उसी नदी के तट पर एक सिंघा नाम का शेर पानी पीने आया।

उस नदी के तट पर सिंघा ने दूर से ही तेजा घोड़े की हुंकार सुन ली थी। तेजा की आवाज़ सुन कर सिंघा डर गया और पास की झाड़ियों में छिप गया।

उस झाड़ी में सिंघा शेर के साथ 2 गीदड़ भी छिपे हुए थे। उनका नाम था पपलू और चपलू। ये दोनों गीदड़ हमेशा शेर के पीछे पीछे रहते थे। जब शेर कोई शिकार करता और बचा कुचा छोड़ कर चला जाता तो पपलू और चपलू उसे चट कर जाते थे।

पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) में बताया गया है कि पपलू और चपलू दोनों शेर के चमचे थे।

पंचतंत्र की इस कहानी (Panchtantra Ki Kahani) में पपलू और चपलू ने जब देखा की उसका राजा सिंघा भी डर गया है, तो वह और भी भयभीत हो गए।

साथ ही आश्‍चर्य में भी पड़ गए। क्योंकि पपलू और चपलू ने पहली बार अपने जंगल के राजा को डरते देखा था, जो उनके लिए एक अचम्भे की बात थी। इससे पहले कभी भी सिंघा नही डरा था, वह किसी से नही डरता था।  

आप पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) kahani.hindualert.in में पढ़ रहे हैं। आगे पढ़िए इस पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) में क्या होता है?

क्या सिंघा तेजा कि सामना करता है? क्या घसीटा राम अपनी मंज़िल तक पहुँच पाता है? यह सब जानने के लिए आपको पंचतंत्र की इस कहानी (Panchtantra Ki Kahani) को आगे पढ़ना चाहिए।

सिंघा शेर को डरा देखकर पहलू ने अपने साथ गीदड़ चपलू से कहा – सुनो चपलू! हमारे जंगल का राजा सिंघा है, जंगल के सभी पशु और जानवर उससे डरते हैं। उसी का राज चलता है इस जंगल में।

लेकिन देखो आज वही सिंघा इतना डरा और भयभीत है। हम यहाँ पानी पीने आए थे, सिंघा भी प्यासा है लेकिन प्यासा होने के बाद भी हम पानी ना पीकर डर कर यहाँ छिपे बैठे हैं। सिंघा के इतना भयभीत होने का कारण क्या है? क्या तुमको कुछ पता है?

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चपलू ने पपलू को कहा- कोई भी कारण हो? इससे हमें क्या लेना देना है? हमें दूसरों के काम में कोई मीनमेख नही निकलना चाहिए, ना ही कोई हस्तक्षेप करना चाहिए। जो भी दूसरों के काम में हस्तक्षेप करता है वह बहुत बुरा फँसता है।

क्या तुम नही जानते हो उस बंदर के बारे में जिसने बिना कारण के दूसरे के काम में हस्तक्षेप किया था और फिर उसका क्या परिणाम हुआ।

दूसरे के काम में हस्तक्षेप करने के कारण उस बंदर का बुरा हाल हुआ था। बाद में वह चीखता चिल्लाता रहा लेकिन कोई फ़ायदा नही हुआ।   पपलू ने चपलू से कहाँ – नही मैंने तो नही सुना उस बंदर के बारे में।

क्या मुझे तुम बताओगे ऐसा क्या हो गया था जिससे बंदर का बुरा हाल हुआ?   पपलू ने चपलू से कहा – ठीक है, मैं तुम्हें उस बंदर की कहानी सुनाता हूँ, ध्यान से सुनों!…..

पपलू ने चपलू को कौन सी कहानी (Kahani) सुनाई यह जानने के लिए पंचतंत्र की आगे की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) पढ़ें……पंचतंत्र की आगे की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) जानने के लिए यहाँ क्लिक करें : बन्दर और लकड़ी का टुकड़ा –पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani)  

संक्षेप : पंचतंत्र की कहानी (Panchtantra Ki Kahani) घसीटा राम और मित्रभेद

  हमें आशा है की आपको घसीटा राम और मित्रभेद की यह पंचतंत्र कहानी (Panchtantra Kahani) पसंद आई होगी।

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