सिल्वा सियार और ड्रम | पंचतंत्र की कहानी | Panchatantra ki Kahani

बहादुर ही सफल होते हैं – सिल्वा सियार और ड्रम | पंचतंत्र की कहानी | Panchatantra ki Kahani

Panchatantra ki Kahani : स्वागत है दोस्तों! आज हम आपके लिए पंचतंत्र की नई कहानी लेकर आएँ है। इस कहानी (Kahani) में हम आपको बताएँगे की कैसे केवल बहादुर ही अपने काम में सफल होते हैं, डरने वाले कभी सफल नही होते।

एक समय की बात है एक सिल्वा नाम का सियार था। वह जंगल में अकेले थे और उसे बहुत भूख लगी थी। कई सालों से उस जंगल में बारिश नही हुई थी, इसलिए धीरे धीरे करके सभी जानवर उस जंगल से चले गए थे। सिर्फ़ सिल्वा सियार ही अकेले उस जनले में बचा था।

वह भोजन और पानी की तलाश में एक दिन इधर-उधर भटक रहा था। भटकते-भटकते सिल्वा जंगल से दूर निकल गया और एक निर्जन युद्ध के मैदान में पहुँच गया।

Panchatantra Stories in Hindi में आगे की घटना सीख देने वाली है :

उस मैदान में हाल ही में कोई युद्ध हुआ था, इसलिए सेनाओं का समान इधर-उधर बिखरा पड़ा था। बहुत सा समान सेनाएँ लड़ाई ख़त्म होने के बाद छोड़ कर चली गई थी।

Panchatantra ki Kahani – Silva Siyaar

कुछ देर बाद उस निर्जन युद्ध के मैदान में तेज़ हवाएँ चलने लगी, तो सिल्वा एक झाड़ी में जाकर छुप गया। उसके बाद उसे कुछ आवाज़ सुनाई दी, जिससे वह बहुत डर गया था। आजीब सी डरावनी आवाज़ सुन कर सिल्वा वहाँ से भागने की फ़िराक़ में था।

वह सोचा की जहाँ से आवाज़ आ रही है, वह उसके लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए जल्दी से यहाँ से भाग जाता है। उसने सोचा कि अगर वह समय रहते नही यहाँ से नही भागा तो मुश्किल में पड़ सकता है।

पंचतंत्र की कहानी (Panchatantra ki Kahani) में आगे पता चलता है कि सिल्वा यह सब सोच ही रहा था कि उसके मन में विचार आया, अगर की बिना उस चीज़ को जाने यहाँ से भागना उचित नही होगा। क्या पता किस चीज़ की आवाज़ है।

इसलिए उसने अब भागने का विचार त्याग दिया और अब हिम्मत करके जहाँ से आवाज़ आ रही थी, वहाँ जाने का विचार बनाया।

कुछ देर में सिल्वा सोच समझ कर सावधानी पूर्वक उस स्थान पर गया, उसने साहस करके आख़िरकार उस स्थान में चला ही गया।

वहाँ जाने पर वह क्या देखता है? क्या पंचतंत्र की कहानी (Panchatantra ki Kahani) में में आगे वह किसी बड़ी मुसीबत में पड़ जाता है। या क्या उसे भोजन पानी मिलता है। आइए जानते हैं panchatantra stories in hindi में आगे क्या होता है।

जब सिल्वा उस स्थान पर गया जहाँ से आवाज़ आ रही थी, तो देखता है कि वह आवाज़ तो सिर्फ़ पेड़ की टहनियाँ ड्रम से रगड़ने की वजह से आ रही थी। अब सिल्वा का डर दूर हुआ और वह उस ड्रम के पास गया।

जब वह सियार ड्रम के पास जाता है, तो क्या देखता है की उसके आस पास सेनाओं ने बहुत भोजन-पानी का स्टॉक बनाया हुआ था और सब कुछ वहीं छोड़ कर चले गए थे। अब सिल्वा सियार को महीनों का भोजन-पानी की व्यवस्था हो गई थी।

इसके बाद वह उस मैदान में कुछ महीनों तक अपना घर बना कर रहा, साथ ही भोजन ख़त्म होने के बाद कहाँ जाएगा, क्या करेगा इसकी प्लानिंग करता और दिन के समय आस पास के जंगल में जाकर अपने लिए नए स्थान की तलाश करता था। ताकि भोजन-पानी ख़त्म होने के बाद वह बिना दिक्कत के वहाँ जा सके।

इस पंचतंत्र की कहानी (Panchatantra ki Kahani) से हमें सीखने को मिलता है की डर की वजह से हम अपने हाथ में आया मौक़ा भी गवाँ देते हैं और सफलते से 1 क़दम दूर होकर भी पीछे लौट जाते हैं या रास्ता बदल लेते हैं।

इसीलिए कहा गया है कि केवल बहादुर ही सफल होते हैं, हमें बिना जाने समझे किसी चीज़ से नही डरना चाहिए। अपने डर का डट कर मुक़ाबला करना चाहिए।

दोस्तों ऐसी ही पंचतंत्र की कहानी (Panchatantra ki Kahani) पढ़ने के लिए Kahani.HinduAlert.in पर प्रतिदिन विज़िट करके नई-नई कहानियाँ पढ़ें।

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Naya@Kite

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